Al Jawahiri Death Story: जाने कौन सी आदत अल जवाहिरी पर पड़ी भारी, कैसे हुई मौत

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अमेरिकी खुफिया सूत्रों को इस साल की शुरुआत में अल-ज़वाहिरी की पत्नी, बेटी और नाती-पोते के काबुल के एक मकान में होने की जानकारी मिली थी। तब से एजेंसियां जवाहिरी पर नजर बनाए हुए थीं।

उसकी हर एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। उसे सुबह बालकनी में टहलने की आदत थी। यहीं से एजेंसियों ने उसकी पहचान की और मारने की योजना बनाई।

जवाहिरी पहले पाकिस्तान में छिपा हुआ था लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद उसके पत्नी-बच्चे काबुल पहुंए गए। वहां तालिबानी सरकार के गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के एक सहयोगी के बंगले में रहने लगे। इस महीने की शुरुआत में जवाहिरी भी वहां पहुंच गया। यह बंगला काबुल के शेरपुर में है और इसमें 17 कमरे हैं। चार मंजिला इस बिल्डिंग में एक बेसमेंट भी है। यह बेहद सुरक्षित बंगला था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने महीनों उसके घर के आसपास जाकर जाना कि जवाहिरी की दिनचर्या क्या है। वह बाहर कब आता है। कब छत पर जाता है और कौन-कौन से लोग उससे मिलने आते हैं। इसकी पल-पल की रिपोर्ट पेंटागन में बैठे अधिकारियों को भेजी जा रही थी। बाडइन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूरी तरह पुख्ता जानकारी मिलने के बाद उसे मारने का प्लान बनाया गया।

सुरक्षा अधिकारियों ने एक जुलाई को राष्ट्रपति को इसकी जानकारी दी। बकायदा उस घर का मॉडल उन्हें दिखाया गया। बताया कि वह कब और कैसे बाहर निकलता है। वहां लोगों को खतरा कितना बड़ा है। अन्य लोगों को नुकसान न हो इसकी कोशिश भी की गई। सूत्रों के मुताबिक, बाइडन प्रशासन ने कह दिया था कि किसी की जान नहीं जानी चाहिए। मगर किसी भी तरह से जवाहिरी का खात्मा होना चाहिए। इस बैठक में सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स, नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक एवरिल हैन्स और नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर की निदेशक क्रिस्टीन अबिजैद शामिल थे। पूरी तरह संतुष्ट हो जाने के बाद बाइडन ने 25 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को बुलाया। उन्हें ऑपरेशन की जानकारी दी और अंत में हवाई हमले की स्वीकृति दे दी गई।

जवाहिरी अक्सर घर में ही रहता था लेकिन सुबह के समय उसे बालकनी में टहलने की आदत थी। बस इसी का फायदा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उठाया। बाइडन प्रशासन से हमले की इजाजत मिलते ही अफगानिस्तान के समयानुसार, रविवार सुबह 06:18 बजे रिपर ड्रोन के जरिए उसे ढेर कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उसके साथ कोई और मारा नहीं गया। तालिबान के हक्कानी गुट ने हमले के बाद जवाहिरी के परिवार को भगा दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ड्रोन हमले के बाद, आतंकवादी संगठन हक्कानी नेटवर्क के सदस्यों ने यह बात छिपाने की कोशिश की कि अलकायदा सरगना अयमान अल-ज़वाहिरी काबुल के उसी मकान में था। यहां तक कि इस जगह तक लोगों की पहुंच भी प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि यह मकान तालिबान के शीर्ष सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी के एक शीर्ष सहयोगी का है।

जवाहिरी को मारने के लिए अमेरिका इससे पहले भी कई बार कोशिश कर चुका था। 2001 में अफगानिस्तान के तोरा बोरा की पहाड़यिों में छिपे होने की सूचना मिली थी। मगर, हमला होने से पहले जवाहिरी भाग निकला। वहीं, 2006 में उसके पाकिस्तान के दामदोला में उसके छिपे होने की सूचना मिली थी। खुफिया एजेंसियों ने मिसाइल हमला किया लेकिन वह बचकर भाग निकला।

अल जवाहिरी ने इसी साल अप्रैल में नौ मिनट का एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में उसने फ्रांस, मिस्र और हॉलैंड को इस्लाम विरोधी देश बताया था। इसी वीडियो में जवाहिरी ने भारत में हिजाब विवाद को लेकर भी बेतुका बयान दिया था।

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