शिमला में तीन घंटे बस के नीचे दबा रहा युवक, राजधानी में खुली आपदा प्रबंधन की पोल, जानिए कैसे थे हालात

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शिमला। अरे मुझे निकालो, बहुत दर्द हो रहा है। मेरे बीबी बच्चे छूट गए, कुछ तो करो। नगरोटा से शिमला आई रही बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बस के नीचे दबा युवक दर्द से कराहते हुए बार-बार यही बोल रहा था।

कड़ी मशक्कत के बाद 5:45 बजे अमित विश्वकर्मा (24) पुत्र अरविंद विश्वकर्र्मा को बस के नीचे से निकाल कर अस्पताल भेजा जा सका। कमर तक बस के नीचे दबा युवक करीब तीन घंटे तड़पता रहा। राहत कार्य के लिए मौके पर पहुंची क्रेन की वायर ही टूट गई। दोपहर 2:30 बजे हादसा हुआ और दूसरी क्रेन पहुंचने में दो घंटे लग गए।

राजधानी से सटे हीरानगर के पास हुए बस हादसे ने सरकार के आपदा प्रबंधन के दावों की पोल खोल कर रख दी। घटना स्थल पर अव्यवस्था का आलम रहा। घायलों का अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची। लोगों ने निजी वाहनों में घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

4:40 बजे डाक्टर मौके पर पहुंचे और युवक को दर्द निवारक इंजेक्शन दिया गया। युवक को निकालने के लिए गैस कटर 4:50 बजे घटना स्थल पर पहुंचा। भारी बारिश के बावजूद पुलिस के जवान घायलों को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाने के लिए लगातार जूझते रहे। रस्सियों के सहारे खाई से घायलों को सड़क तक पहुंचाया गया। गनीमत रही की बस पेड़ में अटक कर रुक गई। अगर पेड़ न होता तो नुकसान और अधिक हो सकता था।

समय पर नहीं पहुंचे उपकरण
घटना स्थल पर अव्यवस्था देखकर लोग भड़क गए। राहत कार्य में सहयोग कर रहे पूर्व सैनिक मनोहर सिंह ने कहा कि समय पर क्रेन और कटर न पहुंचने से समस्या पेश आई। पुलिस तो समय से पहुंच गई लेकिन राहत कार्य के लिए जरूरी उपकरण नहीं लाए गए। प्रदेश की राजधानी में यह हाल है, अगर हादसा दूर दराज क्षेत्र में हुआ होता तो हाल बुरे होते।

दुर्घटनास्थल पर न मंत्री पहुंचे न अन्य कोई नेता
शहरी विकास मंत्री घायलों का हाल जानने आईजीएमसी तो पहुंचे लेकिन घटना स्थल पर राहत कार्यों का जायजा लेने कोई नहीं आया। इस पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं।

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