इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से तबाही, 13 की मौत,दर्जनों घायल,राख से गांवों में अंधेरा

लूमागंज: इंडोनेशिया की घनी आबादी वाले द्वीप जावा में ज्वालामुखी फटने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, वहीं सात लोग अब भी लापता हैं.

अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सुलगते मलबे के कारण तलाश अभियान में बाधा आ रही है.

आकाश में 40,000 फुट की ऊंचाई पर राख की चादर बिछ गई
पूर्व जावा प्रांत के लूमागंज जिले में सेमेरू पर्वत में ज्वालामुखी फटने पर आकाश में 40,000 फुट की ऊंचाई पर राख की चादर बिछ गई साथ ही गैस और लावा बहता हुआ नीचे के स्थानों पर आ गया. इस घटना से गई गांव प्रभावित हुए हैं.

भूगर्भीय सर्वेक्षण केन्द्र के प्रमुख इको बुड़ी लेलोनो ने बताया कि तूफान और कई दिनों तक बारिश होने के कारण 3,676 मीटर की ऊंचाई पर सेमेरू पर्वत पर ज्वालामुखी फटा. जिला प्रमुख टी हक ने कहा कि घनी राख के कारण कई गांवों में अंधेरे का आलम है. सैकड़ों लोगों को अस्थायी आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया है और कुछ लोग खुद ही सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं. उन्होंने बताया कि बिजली आपूर्ति ठप हो जाने से परेशानियां पेश आ रही हैं.

57 लोग अस्पताल में भर्ती
राष्ट्रीय आपदा राहत एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने कहा कि कम से कम 13 ग्रामीणों की गंभीर रूप से जलने से मौत हो गई और 57 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 16 की हालत गंभीर है. उन्होंने कहा कि बचाव दल कुराह कोबोकन गांव में एक नदी के किनारे सात निवासियों और खनिकों की तलाश कर रहे हैं जिनके लापता होने की खबर है.

मुहारी ने कहा कि ज्वालामुखी के मलबे से गांव के सारे घर क्षतिग्रस्त हो गए और 900 से अधिक लोग अस्थायी सरकारी आश्रय स्थलों में रह रहे हैं. परिवहन मंत्रालय की प्रवक्ता अदिता इरावती ने कहा कि उनके कार्यालय ने शनिवार को सभी एयरलाइन कंपनियों को ज्वालामुखी के पास के मार्गों से बचने के लिए नोटिस जारी किया है.

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