द्रंग में हाइडल प्रोजेक्ट के विरोध में उतरे ग्रामीण, कहा, उपायुक्त कार्यालय के बाहर देंगे धरना

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पधर (मंडी)। द्रंग विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेगली में प्रस्तावित हाइडल प्रोजेक्ट निर्माण के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने प्रोजेक्ट को रद्द करके सिंचाई सुविधा मुहैया करवाने की मांग उठाई है।

साथ ही चेताया कि अगर मांग को नहीं माना गया तो जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदेश सरकार रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए यहां के स्थानीय ग्रामीणों के हितों से खिलवाड़ कर रही है। इसका पुरजोर विरोध स्थानीय ग्रामीण कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की ग्राम सभा में स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बावजूद अनापत्ति प्रमाण पत्र सरकार के दबाव में जारी किया गया है। उधर, डीसी अरिंदम चौधरी का कहना है कि मामला ध्यान में आया है। इसकी जांच की जाएगी। प्रोजेक्ट के दायरे में करीब 10,000 की आबादी आ रही है।

इसलिए हो रहा विरोध
ग्रामीणों का तर्क है कि वर्ष 2013 से लेकर अब तक बागी नाला में बाढ़ आने से हर साल प्राकृतिक आपदा हो रही है। इस बरसात में भी 6 लोगों की मौत बाढ़ की चपेट में आने से हुई है। सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन तबाह हुई है। हाइडल प्रोजेक्ट बनने से यहां स्थानीय ग्रामीणों के पुश्तैनी घराट (पनचक्की) आदि का अस्तित्व खत्म हो जाएगा जबकि कृषि गतिविधियों को लेकर सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

सिंचाई सुविधा की जरूरत
सेगली पंचायत के पूर्व प्रधान हरि सिंह, वर्तमान उपप्रधान छपे राम, दौलत राम, वार्ड सदस्य प्रोमिला और गोकला देवी ने कहा कि सेगली पंचायत और आस पास लगते क्षेत्र में लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। गोभी, मूली और अन्य नकदी फसलों की पैदावार होती है। सिंचाई सुविधा का अभाव है। प्रदेश सरकार हाइडल प्रोजेक्ट की मंजूरी को रद्द कर यहां किसानों को लिफ्ट से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाए तो बेहतर रहेगा।

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