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Saturday, February 4, 2023
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टकोली के ग्रामीणों को फोरलेन के लिए जमीन देना पड़ा महंगा, अब आने जाने के लिए देना पड़ेगा टोल टैक्स

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मंडी: जिला मंडी की टकोली पंचायत के ग्रामीणों (Takoli Panchayat of Mandi) को नेशनल हाईवे के लिए जमीन देना महंगा पड़ गया. दरअसल, इस पंचायत के लोगों ने अपनी जमीनें नेशनल हाईवे के लिए दी थी. हाईवे के निर्माण के बाद NHAI ने यहां एक टोल प्लाजा भी बनाया. सारा विवाद इसी टोल प्लाजा को लेकर है. ये टोल प्लाजा पंचायत के साथ ही बनाया गया है. लेकिन, टोल प्लाजा का निर्माण इस तरह से किया गया है की ग्रामीणों को यहां से वहां जाने के लिए भी टोल चुकाना होगा.

ग्रामीणों का कहना है कि एनएचएआई ने पहले पंचायत को टोल मुक्त करने की बात कही थी. लेकिन अब एनएचआई पंचायत को टोल मुक्त करने में आनाकानी कर रहा है. ऐसे में इसका विरोध करने के लिए ग्रामीण टोल प्लाजा के बाहर ही धरने पर बैठे हुए हैं. इस धरने को 70 दिन बीत चुके हैं. लेकिन, अभी तक एनएचआई ने ग्रामीणों की मांग पर कोई अमल नहीं किया (Takoli Panchayat Villagers protest against NHAI) है.

युवा संघ टकोली के अध्यक्ष प्रेम चंद ने बताया कि ग्राम पंचायत टकोली के निवासी काफी समय से अपनी पंचायत को टोल फ्री करने को लेकर NHAI और प्रशासन को ज्ञापन सौंप रहे हैं. लेकिन, इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि टोल मुक्त करवाने के लिए स्थानीय पंचायत के लोग दिन रात टोल प्लाजा के सामाने धरने पर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन तथा एनएचएआई के अधिकारी गांव की इस समस्या का समाधान करने के लिए धरना स्थल पर अभी तक नहीं पहुंचे हैं, जिससे समस्त पंचायत वासियों में काफी रोष है.

उन्होंने कहा कि एनएचएआई के द्वारा स्थापित टोल प्लाजा पंचायत के मध्य भाग में स्थापित किया गया है. जिससे पंचायत दो भागों में बार्डर की तरह बंट गई है. उन्होंने कहा कि अपने ही गांव के एक भाग से दुसरे भाग में जाने के लिए टोल पर कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों के घर टोल प्लाजा के एक तरफ है और जमीनें दुसरी तरफ.

इसके अलावा टकोली पंचायत के एक भाग में हॉस्पिटल, विद्युत विभाग का कार्यालय, स्कूल, पटवार भवन व बैंक है. वहीं, दुसरे भाग की तरफ एसडीएम कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय, कॉलेज और सब्जी मंडी है. पंचायत का अधिकतर क्षेत्र कृषि पर निर्भर है और कृषि ही आय का मुख्य स्त्रोत है. यदि गांव के किसानों पर टोल का बोझ पड़ेगा, तो पंचायत के लोग इस बोझ को उठाने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी पंचायत को टोल मुक्त नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.

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