बेगार के खिलाफ आम आदमी के संघर्ष की दास्तान “बगार कनै कुंदा मल”


गगनदीप सिंह: आज डॉक्टर प्रवीण चौधरी द्वारा लिखित किताब जो मुल रूप से पहाड़ी भाषा मे है – बगार कनै कुंदा मल प्राप्त हुई। ये पुस्तक हिमाचल प्रदेश की रियासत नादौन में कुंदामल के नेतृत्व में हुए बेगार के खिलाफ संघर्ष की दास्तान है।

पूरी दुनिया में सामंतवादी काल में राजा महाराजा आम किसानों से मुफ्त में काम करवाते थे, यहां तक कि खाने के लिए भी नही देते थे। शादी, ब्याह, जीवन, मरण कुछ भी हो राजा का संदेष आते ही आम आदमी को राजा के यहां बेगार पर जाना पड़ता था। समय समय पर इसके खिलाफ किसान, आदिवासियों ने विद्रोह का बिगुल फूंक जिसमें नादौन का संघर्ष भी है।

राजाओं के खिलाफ, उसकी सेना के खिलाफ कुंदामल के नेतृत्व में लोग संगठित हुए, लाठी, डंडे बंदूक लेकर उसके खिलाफ बगावत की। आखिर में कुंदामल अपनी जमीन गिरवी रख कर लाहौर गया और राजा के खिलाफ मुकदमा लड़ा और बेगार बंद करवाया।
कुंदामल का जन्म कांगड़ा जिले की तहसील नादौन के गांव करौर में 1965 में हुआ था। उनके दादा जी का नाम सितु राम और बाप का नाम कंबालु राम था जो किसान जाती घिर्थः से संबंध रखते थे। उन्होंने अपने बाप दादा से शोषण की दास्तान सुनी और लड़ने का प्रण लिया।
डॉक्टर प्रवीण चौधरी ने 35 पेज की अपनी पुस्तक में बहुत ही रोचक ढंग से कहानी बताई है। हिमाचल प्रदेश में जगह जगह हुए इस तरह के आंदोलनों को सामने लाने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ी अपने पुरखों से जुल्म के खिलाफ लड़ने की प्रेणना ले सके। पुस्तक कर प्रकाशन हरनाम प्रकाशन होशियारपुर ने किया है। कीमत 50 रुपए।

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