1400 करोड़ से पानी से बाहर आएंगे गोविंद सागर झील में डूबे मंदिर, पहले चरण के लिए 100 करोड़ का बजट स्वीकृत

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बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में समाहित पौराणिक मंदिरों के पुर्नस्थापन एवं जीर्णोद्धार के लिए तैयार की गई 1400 करोड़ रुपए लागत की महत्त्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश की नामी मल्टीनेशनल लारसन एंड टब्रो (एलएंडटी) लिमिटेड कंपनी ने इस परियोजना की डीपीआर तैयार कर ली है जिसे जल्द ही हिमाचल प्रदेश रोड इन्फ्रॉस्ट्रक्चर डिवेल्पमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीआरआईडीसीएल) को सबमिट किया जाएगा। इसके बाद आगे की योजना पर काम शुरू हागा।

इस महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं को चरणवद्ध ढंग से तैयार किया जएगा। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को बजट बुक में डाला है और पहले चरण के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत किया है। बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में पानी के बीच अपलिफ्ट किए जाने मंदिरों का यह प्रोजेक्ट पूरे हिमाचल प्रदेश में एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बनेगा और यह शहर प्रदेश का ऐसा पहला शहर होगा जहां एक भव्य धार्मिक पर्यटन स्थल तैयार होगा। लारसन एंड टब्रो कंपनी ने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की है। साठ के दशक में पुराने शहर के जलमग्र होने के बाद मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं पुर्नस्थापन को लेकर चल रही कवायद को दशकों बाद मूर्तरूप मिलने जा रहा है।

इस परियोजना के क्रियान्वयन में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खासी दिलचस्पी ली और इससे आगे बढ़ाने का कार्य बिलासपुर के उपायुक्त पंकज राय ने किया। योजना के तहत चौदह सौ करोड़ लागत की इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। योजना के तहत जलमग्र मंदिरों को नाले के नौण के पास पुर्नस्थापित किया जाएगा।

इससे पहले नाले के नौण को योजनावद्ध तरीके से डिवेल्प किया जाएगा। इसी परियोजना के दूसरे चरण में सांडू के मैदान को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय विकसित किया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉक-वेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे। टूरिज्म सेक्टर का एक बड़ा प्लेटफार्म झील किनारे विकसित होगा। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से जहां बिलासपुर पूरे प्रदेश भर में एक आदर्श पर्यटक स्थल के रूप में उभरेगा तो वहीं, इससे बिलासपुर का पुराना इतिहास और संस्कृति भी पुनर्जीवित होगी। इससे हर बिलासपुरवासी की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इससे बिलासपुर पर्यटन आकर्षण का केंद्र बनेगा।

जल के आगोश में समा गई एक पूरी संस्कृति
साठ के दशक में भाखड़ा बांध के अस्तित्व में आने के बाद पुराना बिलासपुर शहर भी जल के आगोश में समा गया था। 256 गांव पानी में डूबे थे और एक पूरी संस्कृति जल में समा गई थी। इस दौरान रियासतकालीन 28 मंदिर भी डूबे थे जिनमें खनमुखेश्वर, सीताराम मंदिर, नर्वदेश्वर मंदिर, रंगनाथ मंदिर, शंकर मंदिर, खाकीशाह वीर्थन मंदिर, हनुमान मंदिर सांढू, मंड़ीगढ़ ठाकुरद्वारा मंदिर, रामबाग मंदिर, दिंदयूती मंदिर, धुनी मंदिर, खूहसीता मंदिर, बीड़े की बायं का मंदिर, गोपालजी मंदिर और बुद्धिपुरा मंदिर इत्यादि शुमार हैं। इस समय एक दर्जन के करीब मंदिर हैं जो दशकों से अस्तित्व की बाट जोह रहे हैं। इनमें भी आठ ही मंदिर हैं जिन्हें रि-लोकेट किया जा सकता है।

1400 करोड़ लागत के प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार हो चुकी है। एलएंडटी कंपनी जल्द ही डीपीआर को हिमाचल प्रदेश रोड इन्फ्रॉस्ट्रक्चर डिवेल्पमेंट कारपोरेशन लिमिटेड को सबमिट करेगी। इसके बाद मंदिरों को पुर्नस्थापित करने के लिए कवायद शुरू होगी।
पंकज राय उपायुक्त बिलासपुर

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