19.1 C
Delhi
Saturday, February 4, 2023
HomeCurrent Newsसुप्रीम कोर्ट का हल्द्वानी में 4000 परिवारों के घर तोड़ने से इंकार,...

सुप्रीम कोर्ट का हल्द्वानी में 4000 परिवारों के घर तोड़ने से इंकार, उत्तराखंड सरकार को भेजा नोटिस

- Advertisement -

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में 78 एकड़ रेलवे की जमीन से 4000 परिवारों को बेदखल करने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल 4000 परिवारों के घर नहीं तोड़े जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भेजते हुए इस मामले पर उत्तराखंड सरकार और रेलवे से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि आप 50 हजार लोगों को रातोंरात नहीं हटा सकते। यह एक मानवीय मामला है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इसका व्यावहारिक हल निकालना होगा। हल करने का यह सही तरीका नहीं है। भूमि की प्रकृति, अधिकारों की प्रकृति, स्वामित्व की प्रकृति आदि से कई कोण उत्पन्न होते हैं, जिनकी जांच करने की आवश्यकता है। उन्हें हटाने के लिए केवल एक सप्ताह का समय बहुत कम है। उनके पुनर्वास पर पहले विचार किया जाना चाहिए। बता दें कि जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अब अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी।

जानें क्या है हल्द्वानी रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद
इस विवाद की शुरुआत उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद हुई। इस आदेश में रेलवे स्टेशन से 2.19 किमी दूर तक अतिक्रमण हटाए जाने का फैसला दिया गया। खुद अतिक्रमण हटाने के लिए सात दिन की मोहलत दी गई थी। जारी नोटिस में कहा गया है कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन 82.900 किमी से 80.710 किमी के बीच रेलवे की भूमि पर सभी अनाधिकृत कब्जों को तोड़ा जाएगा।

स्कूलों-कॉलेजों को इस तरह से नहीं गिरा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस जमीन पर आगे कोई निर्माण नहीं होगा। पुनर्वास योजना को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे स्कूल, कॉलेज और अन्य ठोस ढांचे हैं जिन्हें इस तरह नहीं गिराया जा सकता है।

जो लोग 50-60 सालों से रह रहे उनका क्या होगा?: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का स्टैंड क्या है इस मामले में? शीर्ष अदालत ने पूछा कि जिन लोगों ने नीलामी में जमीन खरीदी है, उसे आप कैसे डील करेंगे? लोग 50/60 वर्षों से वहां रह रहे हैं। उनके पुनर्वास की कोई योजना तो होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील ने दी दलील
वहीं इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील देते हुए कहा कि प्रभावित होने वाले लोगों का पक्ष पहले भी नहीं सुना गया था और फिर से वही हुआ। हमने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ये भी साफ नहीं है कि ये जमीन रेलवे की है। हाईकोर्ट के आदेश में भी कहा गया है कि ये राज्य सरकार की जमीन है। इस फैसले से हजारों लोग प्रभावित होंगे।

- Advertisement -

समाचार पर आपकी राय:

Related News
- Advertisment -

Most Popular

16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe

Special Stories

वर्ल्ड कैंसर डे 2023: जानें कैसे होता है किडनी कैंसर, इन...

0
किडनी के कैंसर (Kidney Cancer) के प्रारंभिक लक्षणों व संकेतों को पहचानना इलाज की सफलता के लिए बहुत जरूरी है। कई बार किडनी के कैंसर...

World Cancer Day 2023: जानें कैसे होता है माउथ कैंसर और...

0
World Cancer Day 2023: डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2020 में एक करोड़ लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई है. हर 6 में से एक मौत...

Apple ने भारतीय बाजार में बनाया नया रिकॉर्ड, 2022 की चौथी...

0
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी ऐपल भारत में बिक्री लगातार को लेकर नया रिकॉर्ड कायम कर रही है। कंपनी बिक्री दोहरे अंकों में बढ़...