भर्ती में आरक्षित वर्ग की महिला, सामान्य वर्ग में जा सकती है- सुप्रीम कोर्ट का आदेश

महिलाओं को नौकरी में आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, कोर्ट ने कहा है अगर कोई आरक्षित वर्ग की महिला सामान्य वर्ग के लिए तय कटआफ अंक से ज्यादा लाती है तो उसे सामान्य वर्ग में जाने का हक है। यानी वह महिला उम्मीदवार सामान्य वर्ग में गिनी जाएगी उसे आरक्षित वर्ग में नहीं गिना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ओपन (सामान्य) कैटेगरी सभी के लिए है उसमें आरक्षित वर्ग के लोग भी आते हैं और ओपेन कैटेगरी में सिर्फ मेरिट ही आधार होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के मामले में वर्टिकल यानी सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण और हारिजेंटल यानी महिला, भूतपूर्व सैनिक आदि को दिए जाने वाले विशेष आरक्षण के फंसे पेच को सुलझाते हुए यह व्यवस्था दी है और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती में सामान्य वर्ग की कटआफ से ज्यादा अंक लाने वाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार को नौकरी पर रखने का आदेश दिया है। 

जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस. रविंद्र भट और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ ने उत्तर प्रदेश में 2013 की सिपाही भर्ती मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है।

सोनम तोमर की याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दिया ये बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश में सिपाही भर्ती की परीक्षा पास करनेवाली सामान्य श्रेणी की उम्मीदवार सोनम तोमर की अर्जी स्वीकार करते हुए कहा कि ओबीसी की महिला श्रेणी की सभी उम्मीदवार जिन्होंने ओपन (सामान्य) कैटेगरी की कटऑफ 274.8928 से ज्यादा अंक पाए हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही की नौकरी दी जाए।
इस फैसले में कोर्ट ने विशेष ध्यान रखते हुए कहा है कि वैसे तो जिनके अंक कम थे और नियुक्त कर दिए गए हैं उन्हें हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में वे लोग ट्रेनिंग पर भेजे जा चुके हैं और अभी पद बचे हुए हैं इसलिए उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया जाए।

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