Iraq Curfew: इराक में शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने छोड़ी राजनीति, सेना से देश भर में लगाया कर्फ्यू

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Curfew In Iraq: इराक (Iraq) के शक्तिशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर (Muqtada Al Sadr) के राजनीति छोड़ने की घोषणा के बाद हुई हिंसा पर लगाम लगाने के लिए इराकी सेना (Iraq Army) ने पूरे देश में कर्फ्यू (Curfew) लगा दिया है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए की गई फायरिंग में 08 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. जनता सड़कों पर है और नारेबाजी कर रही है.

शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर के राजनीति छोड़ने की घोषणा के बाद इराक नेतृत्व हीन हो गया. इस समय वहां न ही कोई सरकार है और न ही कोई राष्ट्राध्यक्ष. जनता सड़कों पर है. सेना ने पहले राजधानी बगदाद में कर्फ्यू की घोषणा की थी लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने उसको नजरअंदाज कर दिया को हालिया माहौल को देखते हुए सेना ने इराकी समय के अनुसार कल सुबह 7 बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है.

राष्ट्रपति भवन में घुसे समर्थक
राजनीति छोड़ने की घोषणा के बाद मुक्तदा अल-सदर के समर्थक नारेबाजी करते हुए इराक के राष्ट्रपति भवन में घुस गये. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक ग्रीन जोन में सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में मुक्तदा के 08 समर्थकों की गोली लगने से मौत हो गई तो वहीं कुल 22 सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गये. एएफपी के अनुसार सुरक्षाबलों ने ग्रीन जोन के प्रवेश द्वार पर मुक्तदा के समर्थकों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे.

इराक में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमआई) ने बिगड़ती परिस्थिति पर टिप्पणी करते हुए इसको बेहद खतरनाक करार दिया और प्रदर्शनकारियों से संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र को तुरंत खाली करने का आग्रह किया. उसने ट्वीट कर प्रदर्शनकारियों से कहा कि सभी प्रदर्शनकारियों को ऐसी किसी भी स्थिति से बचना चाहिए जो देश के अस्तित्व को ही संकट में डाल दे. गौरतलब है कि सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक गतिरोध के बीच इराक में पिछले साल अक्टूबर से अभी तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है.

कौन हैं मुक्तदा अल-सदर?
मुक्तदा अल-सदर (Muqtada Al Sadr) इराक (Iraq) के बहुत ही शक्तिशाली शिया धर्मगुरु (Shiite cleric) हैं. जिन्होंने कभी अमेरिकी (USA) और इराकी सरकारी सुरक्षा बलों के खिलाफ सैन्य आंदोलन (Armed Protest) छेड़ा था. उन्होंने सोमवार को घोषणा कि वह सदा के लिए राजनीति छोड़ रहे हैं. इराक की राजनीति में पिछले कई सालों से एक बहुत ही शक्तिशाली व्यक्ति रहे मुक्तदा ने कहा कि मैंने राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला किया है इसलिए मैं अब अपनी निश्चित सेवानिवृत्ति की घोषणा करता हूं. हालांकि उनके इस्तीफे की वजहों का पता नहीं चल सका है.

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