राजनीतिक सर्वे ने उड़ाई भाजपा के विधायकों और मंत्रियों की नींद, पार्टी हर सीट पर विकल्प ढूंढने को विवश

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शिमला। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी चुनाव लडऩे के इच्छुक लोगों से आवेदन मांग रही है, दूसरी तरफ भाजपा में मंत्री-विधायकों की नींद सर्वे ने उड़ा रखी है। सत्तारूढ़ दल जीतने की क्षमता रखने के लिए अलग-अलग माध्यम से सर्वे करवा रहा है। पार्टी में चर्चा है कि कुल तीन तरह के सर्वे दिल्ली से हो रहे हैं। इसमें एक में कंपैरेटिव स्टडी की जा रही है, जिसमें भाजपा के अलावा अन्य दलों की संभावनाओं पर लोगों से पूछा जा रहा है। बाकी सर्वे चुनाव क्षेत्र विशेष आधारित हैं और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी में मौजूद विकल्पों पर हैं। इन सर्वे में जिन चुनाव क्षेत्रों से कैबिनेट मंत्री भी हैं, वहां भी तीन चेहरों में से विकल्प पूछा जा रहा है।

इसका यह अर्थ लगभग तय है कि अभी किसी का भी टिकट पक्का नहीं और यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी में इस चुनाव में टिकट को लेकर कई तरह के असमंजस हैं। पार्टी का कोर ग्रुप बहुत जल्दी-जल्दी बैठकर कर रहा है और इस कोर ग्रुप में हर विधानसभा क्षेत्रवार उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा हो चुकी है। यही रिपोर्ट सर्वे के लिए भी दिल्ली गई थी और इस पर अब दिल्ली से पार्टी अपना फीडबैक एकत्र कर रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जब जेपी नड्डा पहली बार शिमला आए थे, तो वह दिल्ली की टीम द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट अपने साथ लाए थे और पीले लिफाफे में सभी विधायकों को यह रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन टिकट के आबंटन से पहले कौन सी रिपोर्ट किसके खिलाफ आ जाए, इससे सभी डरे हुए हैं।

इलेक्शन कमेटी में होगी टिकट पर चर्चा

हिमाचल भाजपा के प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने बताया कि पार्टी में विधायकों के काम का आकलन होता रहता है और हम हर साल की रिपोर्ट भी लेते हैं, लेकिन टिकट की संभावनाओं को लेकर सारी बात राज्य की इलेक्शन कमेटी में ही होगी और उसके बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड को भी रिकार्ड भेजा जाएगा। प्रत्याशी के चयन के लिए सर्वे एक महत्त्वपूर्ण आधार तो होगा ही, लेकिन मंडल से भी बात करेंगे। भाजपा में कार्यकर्ता का सर्वे ही सबसे अहम है।


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