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नेपाल ने भारत के इन हिस्सों पर जताया अपना दावा, जाने क्या बोले प्रधान मंत्री देउवा

RIGHT NEWS INDIA: नेपाल सरकार ने शनिवार को एक बार फिर लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपना हिस्सा करार दिया है। नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने देश की संसद में बोलते हुए कहा कि ये क्षेत्र नेपाल के हैं। सरकार को इसके बारे में अच्छी समझ है। उन्होंने कहा कि सीमा का मुद्दा संवेदनशील है और हम समझते हैं कि इसे कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।

क्या बोले नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा
संसद में बोलते हुए नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने कहा कि नेपाल गुटनिरपेक्ष विदेश नीति अपनाता रहा है। नेपाल सरकार ने हमेशा राष्ट्रीय हित को सामने रखा है और अपने पड़ोसियों और अन्य देशों में पारस्परिक लाभ के मुद्दों पर काम किया है। उन्होंने कहा कि इस पर कार्रवाई करते हुए हम राजनयिक माध्यमों से अपने प्रयास कर रहे हैं। सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं और नीतियों में इस मुद्दे को उचित स्थान दिया गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने पूछा था सवाल
दरअसल, नेपाल में हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न हुए हैं। जिसमें नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को करारी हार का सामना करना पड़ा है। जिसके बाद उनके बोल फिर बिगड़ गए थे। उन्होंने उत्तराखंड के कालापानी और लिपुलेख पर दोबारा नेपाल का दावा पेश किया था। साथ ही उन्होंने गुरुवार को प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से भी सवाल किया था कि वे कालापानी व लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा मानते हैं या नहीं? पूर्व पीएम के इसी सवाल का जवाब प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने संसद में दिया।

2020 से संबंधों में आई खटास
गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच हमेशा से मधुर संबंध रहे हैं। भारत और नेपाल के रिश्तों में तब खटास आ गई थी जब पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 2020 में नेपाल का नया नक्शा जारी किया था। नेपाल के चीन समर्थक वामपंथी दल अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि भारत सरकार उन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां कर रही है, जो नेपाल के हैं, यहां तक कि जून 2020 में इसके लिए नेपाल ने अपना नक्शा बदलकर इन इलाकों को नक्शे में अपना घोषित कर दिया था।

लिपुलेख दर्रा, कालापानी के पास एक सुदूर पश्चिमी स्थान है, जो नेपाल और भारत के बीच का सीमा क्षेत्र है। नेपाल पिछले कुछ समय से इसे अपना हिस्सा बताने लगा है, जबकि असल में यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आता है। वहीं, नेपाल दावा करता है कि यह उसके धारचूला जिले के हिस्सा है।