हिमाचल कांग्रेस में सरकार बनाने और मुख्यमंत्री बनने के लिए लॉबिंग शुरू, जानें कौन सा नेता है दौड़ में आगे

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शिमला। हिमाचल में विधानसभा चुनावों के नतीजें 8 दिसंबर को आएंगे। कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है। चुनावी नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस नेता सत्ता के सर्वोच्च सिंहासन तक पहुंचने के लिए लाबिंग में जुट गए हैं।

कांग्रेस नेता भले ही इस बात से इंकार कर रहे हैं। दिग्गज नेताओं के दिल्ली दौरे और आला नेताओं से मिलने के कार्यक्रम इसकी पुष्टि कर रहे हैं। प्रदेश में सरकार किसकी बनेगी इससे ज्यादा चर्चा कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा इसको लेकर है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला पहले ही सपष्ट कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री का चयन विधायक करेंगे। यानि जिसके पास ज्यादा विधायकों का समर्थन होगा वही मुख्यमंत्री बनेगा।

विधायक किसको समर्थन देंगे यह सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है

विधायक किसको समर्थन देंगे यह सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। हिमाचल में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा और 6 बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद यह पहला मौका था तब कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी है। पूर्व के चुनावों पर नजर डाले तो कांग्रेस जब भी सत्ता में आई हर बार वीरभद्र सिंह ही मुख्यमंत्री का चेहरा होते थे। कांग्रेस पार्टी में टिकटों का आबंटन कोटे के आधार पर होता है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और प्रचार समिति अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू तीनों ही नेताओं ने अपने करीबियों को टिकट दिलवाई है। सबसे ज्यादा टिकट प्रतिभा सिंह ने दिलवाई है।

प्रतिभा सिंह व सुक्खू समर्थक कर रहे बैठकें

कांग्रेस पार्टी में आंतरिक गुटबाजी किसी से छुपी नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ को लेकर पार्टी में अंदर खाते शुरू हुई जंग से नेता नतिजों से पहले ही खेमों में बंटना शुरू हो गए हैं। पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर और कौल सिंह ठाकुर, ठाकुर सिंह भरमौरी सहित कई बड़े नेता चुनावों के बाद हॉलॉज पहुंचे थे। वहीं युवा टीम सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ खड़ी है। सुक्खू के साथ इनकी कई बैठकें भी हो चुकी है। हॉलीलाज के बाद नेताओं ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है।

मुख्यमंत्री की रेस में ये नेता आगे

कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे पर बात करें तो सुखविंद्र सिंह सुक्खू रेस में सबसे आगे हैं। वह प्रचार समिति के अध्यक्ष हैं। 18 के करीब करीबियों को टिकट मिला है। विधायकों का समर्थन पहले से इनके पास है। हाईकमान के भी ये करीबी माने जाते हैं। इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री कौल सिंह ठाकुर भी मुख्यमंत्री की रेस में है। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्रिहोत्री, पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर, आशा कुमारी और हर्षवर्धन चौहान भी मुख्यमंत्री का चेहरा है।

प्रतिभा सिंह को बताया जा रहा चेहरा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षा प्रतिभा सिंह ने यह चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन राजनीतिक जानकार उन्हें भी मुख्यमंत्री की रेस में बता रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि यदि उनके ज्यादा विधायक जीत कर आते हैं तो वह सीएम चेहरा हो सकती है।

सत्ता बदलने का है ट्रेंड

भाजपा ने रिवाज बदलने के नारे के साथ पूरा चुनावी कैंपेन किया। वहीं हिमाचल के चुनावी इतिहास पर नजर डाले तो 1985 से अब तक हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल पर सरकार बदलने का ट्रेंड रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी ये ट्रेंड बरकरार रहता है या फिर भाजपा सरकार में वापसी करके इसे बदलेगी।

कांग्रेस की थी रणनीति

कांग्रेस की मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करना रणनीति का हिस्सा था। कांग्रेस का तर्क था कि कई सीटें मुख्यमंत्री चेहरे के नाम पर आसानी से जीती जा सकती है। इसलिए सीएम का फेस ही घोषित नहीं किया गया।

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