गृह मंत्रालय ने कॉमन कम्युनिकेशन प्लान को दी मंजूरी, कोस्टल सिक्योरिटी होगी मजबूत

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द्रीय गृह मंत्रालय ने कोस्टल सिक्युरिटी के लिए कॉमन कम्यूनिकेशन प्लान को मंजूरी दे दी है. इस योजना में समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बेहतर समन्वय और अभियान के लिए अहम सूचना के बिना किसी परेशानी के आदान-प्रदान के लिए इकट्ठा करने का प्लान बनाया गया है.

भारतीय नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह योजना सामान्य संचार नेटवर्क में सभी कोस्टल सिक्युरिटी एजेंसियों को इस उद्देश्य के लिए एक समर्पित स्पेक्ट्रम से जोड़ने में सक्षम होगी.

मुंबई में पश्चिमी नौसैन्य कमान के एक अधिकारी ने बताया कि समर्पित स्पेक्ट्रम एक सामान्य बैंड का प्रयोग करेगा और यह कोस्टल सिक्युरिटी मजबूत करने में एक बड़ा कदम होगा. उन्होंने बताया कि कोस्टल सिक्युरिटी की संरचना में संयुक्त अभियान, अभ्यास और ऐसी गतिविधियां शामिल हैं जिनमें नौसेना के कमान एवं नियंत्रण केंद्र की कई एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पड़ती है.

एक साथ कई एजेंसियों की होगी नजर

अधिकारी ने कहा कि इसलिए कोस्टल सिक्युरिटी में शामिल एजेंसियों और इकाइयों के बीच संचार बहु-एजेंसी समन्वय और मिशन के लिए अहम सूचना के निर्बाध आदान-प्रदान में अहम भूमिका निभाता है ताकि कोस्टल सिक्युरिटी गतिविधियों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके. उन्होंने बताया कि मछली पकड़ने वाली नावों में अंतरिक्ष आधारित ट्रांसपोंडर लगाने के गुजरात और तमिलनाडु में सफल परीक्षण हुए जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) विकसित कर रहा है.

अवैध नावों का पहचान करना मुश्किल

अधिकारी ने कहा कि भारतीय समुद्री क्षेत्र में बड़ी संख्या में नावों की मौजूदगी के कारण कोस्टल सिक्युरिटी सुनिश्चित करने के दौरान मछली पकड़ने वाली अवैध नावों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती है और अंतरिक्ष आधारित ट्रांसपोंडर से इस समस्या से निपटने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, इस चुनौती से निपटने के लिए इसरो ने मछली पकड़ने वाली नावों खासतौर से 20 मीटर से कम लंबाई वाली नावों के लिए उपग्रह आधारित ट्रांसपोंडर बनाने की एक परियोजना शुरू की है.

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