हिमाचल को हर साल हो रहा 4000 करोड़ का नुकसान, मुख्यमंत्री ने की जीएसटी कंपनसेशन की मांग

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शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि हिमाचल का जीएसटी कंपनसेशन बहाल किया जाए, जिसे बंद कर दिया गया है।

इससे राज्य को हर साल 4000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बुलाई गई प्री बजट कंसल्टेशन बैठक में बोल रहे थे। इस बैठक के लिए मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव आरडी धीमान और अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना भी दिल्ली गए हुए हैं।

हिमाचल ने मुख्यत: तीन बातें केंद्र सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें से सबसे महत्त्वपूर्ण जीएसटी कंपनसेशन और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम की बहाली है। जीएसटी से संबंधित फैसले सामान्य तौर पर जीएसटी काउंसिल लेती है, जिसमें राज्यों के मुख्यमंत्री भी सदस्य हैं, लेकिन केंद्र सरकार चाहे तो आम बजट में इसके लिए अलग से प्रावधान कर सकती है। यही वजह है कि चुनाव आचार संहिता के बीच में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को खुद इस बैठक के लिए दिल्ली गए हैं।

मुख्यमंत्री ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम की बहाली और दूसरा पहाड़ी राज्यों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हेली एंबुलेंस शुरू करने का प्रस्ताव भी इस बैठक में रखा। यदि पर्वतमाला स्कीम की तरह थैली एंबुलेंस के लिए भी कोई स्कीम भारत सरकार के ही बजट में आ जाए, तो हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को इससे मदद मिलेगी। इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम के तहत राज्य में स्थापित होने वाले नए उद्योगों को इन्वेस्टमेंट सब्सिडी मिलती थी, जो अब बंद हो गई है। 31 मार्च 2022 से पहले भेजे गए मामलों में भी अभी सब्सिडी लंबित है।

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