कुल्लू में माता के मंदिर में एकत्रित होकर हरियानों ने जलती मशालों के साथ भगाई बुरी शक्तियां

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जिले में भाद्रपद संक्रांति से मेलों का आगाज हुआ है। इन्हीं परंपराओं का निर्वहन करते हुए भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सैंज के बनोगी देहऊरी पटाहरा में माता दुर्गा के सम्मान में हूम पर्व मनाया गया।

पटाहरा में माता के मंदिर में एकत्रित होकर हारियानों ने जलती मशालों से बुरी शक्तियों को भगाया। देर रात को माता का रथ मंदिर से बाहर निकाला गया। इस दौरान सैकड़ों हारियानों ने मशालें ऊपर उठाईं। माता के निर्देश पर तीन बार परिक्रमा की। इसके बाद बुरी शक्तियों को भगाने का दौर शुरू हुआ। इस देव कारज के हजारों श्रद्धालु गवाह बने।

उल्लेखनीय है कि हूम पर्व में माता दुर्गा के दर्शन के लिए हजारों की श्रद्धालु पटाहरा गांव में पहुंचे। इस पर्व में सैंज घाटी की ग्राम पंचायत बनोगी, सुचैहण और दुशाहड़ के कई गांव के लोगों समेत रैला, पल्दी, शैंशर, शांघड़, भलाण, कनौन, धाऊगी क्षेत्रों के श्रद्धालुुओं ने भी हाजरी भरी। इस पर्व के प्रति घाटी वासियों में गहरी आस्था है।

मान्यता है कि हूम पर्व से एक सप्ताह पहले से माता दुर्गा के प्रमुख कारकून उपवास रखते हैं। आदि काल से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार मुख्य कारकूनों के लिए बाल, नाखून काटना निषेध है। उन्हें जमीन पर आसन लगाकर सोना पड़ता है। जिन क्षेत्रों में हूम पर्व मनाया जाता है, उनमें मीट का सेवन भी प्रतिबंधित है। इस परंपरा का घाटी के लोग आज भी निर्वहन कर रहे हैं।

भगवती नव दुर्गा कमेटी के प्रधान चमन राणा कहा कि पटाहरा हूम पर्व माता दुर्गा के निर्देशों अनुसार मनाया गया। इस पर्व में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। इस दौरान कारदार किशन चंद, गुर ढोले राम, धामी रोशन लाल, पुजारी लीलाधर आदि उपस्थित रहे।

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