Mandi News: सुंदरनगर में वन विभाग का कारनामा, लेबर कोर्ट से टर्मिनेट कर्मियों को कर दिया रेगुलर

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शिमला: हिमाचल प्रदेश के वन विभाग के सुकेत वन मंडल सुंदरनगर की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। सुकेत वन मंडल ने लेबर कोर्ट धर्मशाला से 2012-13 में टर्मिनेट 6 में से 5 लोगों को सोमराज, किशोर कुमार, हरिसिंह, घनश्याम व देबू को 2017 में नियमित कर दिया है जबकि एक व्यक्ति घनश्याम पुत्र केशव राम को छोड़ दिया गया, जिससे सुकेत वन मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। 2012 में धर्मशाला लेबर कोर्ट ने इन 6 लोगों को नियमित करने के लिए एक साल में जरूरी 240 दिन की सेवाएं पूरी न होने की योग्यता को अधूरा पाया था और इनकी नियुक्ति को भी डिसमिस कर दिया था लेकिन हैरानी की बात यह है कि कोर्ट के आदेशों को दरकिनार करते हुए सुकेत वन मंडल ने 2017 में इनमें से 5 कर्मियों को नियमित कर दिया।

मामले को लेकर घनश्याल पुत्र केशव राम ब्लॉक बेहली, रेंज ऑफिस कांगू सुन्दरनगर ने मार्च 2021 में शिमला पीसीसीएफ, सीसीएफ मंडी, डीएफओ सुकेत को लिखित में शिकायत दी है और नियुक्तियों की जांच की मांग की है, जिस पर सुकेत वन मंडल डीएफओ जांच कर रहे हैं लेकिन 1 साल से भी अधिक का समय बीत जाने पर भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। डीएफओ सुकेत वन मंडल सुभाष पराशर से जब इस बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नियुक्तियों को लेकर जांच चल रही है अगर कुछ भी खामियां पाई जाती हैं तो उचित कारवाई दोषियों के खिलाफ की जाएगी।

विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नियुक्तियों में जांच के दौरान अनियमितताएं पाए जाने के तथ्य सामने आए हैं क्योंकि जो दस्तावेज धर्मशाला लेबर कोर्ट में 2012 में दिए गए थे उसके मुताबिक नियुक्तियां रद्द कर दी गईं थीं लेकिन बाद में विभाग ने 2017 में दूसरे दस्तावेज के आधार नियुक्ति दे दीं जो सवालों के घेरे में है। मामले को लेकर शिमला राज्य वन विभाग मुख्यालय में पूछा गया तो जवाब मिला कि मामले को लेकर जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद काईवाई की जाएगी।

वहीं शिकायतकर्ता घनश्याम पुत्र बाबू राम उर्फ केशव राम ने मामले को लेकर डीएफओ सुकेत वन मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद गलत नियुक्तियां की हैं। अगर नियुक्तियां गलत नहीं हैं तो उन्हें क्यों नियमित नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने सरकार से गुहार लगाई है कि मामले की जल्द छानबीन की जाए और अगर नियुक्तियां गलत पाई जाती हैं तो उन्हें रद्द किया जाए अन्यथा उन्हें भी वन विभाग नियमित करे या जहर खाने की सरकार परमिशन दे।

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