रोमानिया के हॉस्पिटल में लगी आग, जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे मरीज, अब तक नौ की मौत

Romania Hospital Fire: यूरोपीय देश रोमानिया के शहर कोन्स्तांता के एक अस्पताल में शुक्रवार सुबह आग लग गई. जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है. इस बात की जानकारी अधिकारियों ने दी.

देश के आपातकालीन स्थिति निरीक्षण कार्यालय ने कहा कि सभी मरीजों को संक्रामक रोगों के कोन्स्तांता अस्पताल से निकाल लिया गया है और दोपहर तक आग बुझा ली गई थी (Fire in Hospital). स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ज्यादा जानकारी प्रेस वार्ता में दी जाएगी.

मंत्रालय ने इसका समय अभी नहीं बताया है. बयान में कहा गया कि 113 मरीज अस्पताल की चिकित्सा इकाई में थे, जिनमें से 10 गहन चिकित्सा इकाई के मरीज थे. स्थानीय चैनल्स ने घटना का वीडियो फुटेज भी दिखाया, जिसमें मरीज जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदते दिख रहे हैं. बाद में फिर बचावदल के सदस्यों ने लोगों को बाहर निकाला (Romania Hospital Fire Incident). अब तक करीब 50 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है. कोरोना वायरस के कारण अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज भर्ती थे.

सुरक्षा प्रणाली पर खड़े हुए सवाल

1.9 करोड़ की आबादी वाले यूरोपीय संघ के देश रोमानिया में पिछले एक साल के भीतर दो अन्य अस्पताल में घातक आग लगी है, जिसने देश के पुराने अस्पतालों के बुनियादी ढांचों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं. अब एक बार फिर आग लगने से सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं (Health Care System in Romania). बीते साल नवंबर में, उत्तरी शहर पियात्रा नीमत में कोविड-19 मरीजों के आईसीयू में आग लगने से 10 लोगों की मौत हो गई थी.

जनवरी में हुई थी पांच लोगों की मौत

जनवरी में एक और आग ने बुखारेस्ट के मातेइ बाल्स अस्पताल के एक वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें कम से कम पांच लोग मारे गए थे. मातेइ बाल्स की आग के बाद, राष्ट्रपति क्लाउस इओहानिस ने तत्काल और ‘गहन’ सुधार का आह्वान किया था (Least Developed Country of Europe). उन्होंने कहा था कि इस तरह की त्रासदी ‘फिर से नहीं होनी चाहिए.’ इस देश का हेल्थ केयर सिस्टम कोरोना महामारी से पहले भी इसी खस्ता हालत में था. बीते तीन दशक में सरकार ने केवल एक अस्पताल बनवाया है. ये यूरोप का ऐसा देश है, जहां हेल्थ सिस्टम पर काफी कम खर्च किया जाता है. जिसके चलते डॉक्टरों और नर्स को भी दूसरे देशों का रुख करना पड़ता है.

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