ड्रोन केमिकल से जंगल की बुझाएगा आग, करोड़ों की वन संपदा राख होने से बचेगी

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हिमाचल प्रदेश में जंगलों की आग बुझाने के लिए ड्रोन को बड़ा माध्यम बनाया जा रहा है। जंगलों में जहां फायर ब्रिगेड, पानी और लोग नहीं पहुंच पाते, वहां आग के कारण करोड़ों की वन संपदा राख हो जाती है।

ऐसे में अब वहां ड्रोन आग बुझाएंगे। इसके लिए वन विभाग और आईटी विभाग प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। इसके लिए आईआईआईटी मंडी की मदद ली जाएगी। अगस्त में आईआईटी मंडी के स्टार्टअप में भी यह मॉडल युवा शोधकर्ता और उद्यमी कर चुके हैं, जिसे प्रथम तीन श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। अब वन विभाग इस नई तकनीक पर काम शुरू करने पर विचार कर रहा है। एक ऐसे केमिकल का प्रयोग किया जाएगा, जो करीब ढाई एकड़ जमीन में आग बुझाने में सक्षम होगा। हालांकि, यह भी दावा किया जा रहा है कि यह केमिकल शत-प्रतिशत ईको फ्रेंडली और बोया-डिग्रेडेबल होता है। आईटी विभाग के प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने कहा कि इस तकनीक पर विचार किया जा रहा है।

ड्रोन में केमिकल से भरी 12 बॉल्स ले जाने की क्षमता
विभाग ने मंडी और कुल्लू से जुड़े एक स्टार्टअप से संपर्क किया है, जिन्होंने ऐसा ड्रोन तैयार किया है। यह एक साथ केमिकल से भरी 12 बॉल्स (गेंद) ले जा सकेगा। कंपनी के अधिकारियों ने दावा किया कि एक बॉल नौ स्क्वेयर मीटर एरिया यानी करीब ढाई एकड़ में आग बुझाने को पर्याप्त होगा। यह ड्रोन 80 किलोमीटर तक अप और डाउन कर सकेगा। कुल्लू के शरद खन्ना और उनकी टीम ने इसे बनाया हैै। टीम ने यह भी दावा किया है कि यह ड्रोन 50 किलो भार उठाकर उड़ान भरता है।

ऐसे करेगा काम
ड्रोन के माध्यम से छोटी फ्लाइट अधिक कारगर साबित होगी। अधिक आग होने पर एक साथ कई ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं। इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक रिमोट से उड़ाया जाएगा। जहां आग लगी है, वहां केमिकल से भरी गेंद को गिराया जाएगा। यह आग में गिरते ही ताप अधिक होने पर फट जाएगी। इसमें केमिकल धुएं कर तरह फैल जाएगा।

अब तक स्वास्थ्य, कृषि में हो चुका है सफल
अब तक ड्रोन से स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बेहतर काम किया जा रहा है। इससे बर्फबारी या आपदा प्रभावित इलाकों में दवाइयां, खाना आदि भेजा जा सकता है। प्रदेश भर में ड्रोन से अब दवाइयों की सप्लाई मरीजों और दूरदराज के अस्पतालों तक की जा रही है। कृषि विभाग भी केमिकल छिड़काव सहित अन्य कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। बागबानी में भी ड्रोन का प्रयोग हो रहा है।

हिमाचल में हैं 2026 वन वीट
प्रदेश में करीब 2,026 वन बीट हैं। इनमें 339 अति संवेदनशील हैं और 667 संवेदनशील हैं। हालांकि, इनमें 1,020 बीट ही सामान्य बीट हैं। इस साल में अप्रैल-मई में ही प्रदेश में 409 आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 3,209 हेक्टेयर एरिया जलकर राख हो गया था। यह आग की घटनाएं शिमला, रामपुर, मंडी और धर्मशाला वन बीटों में हुई हैं।

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