नई अधिसूचना से उखड़े डाक्टर, हिमाचल प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ सरकार के आदेशों से खफा






हिमाचल प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने सरकार की ओर से जारी उस अधिसूचना का संज्ञान लेते हुए कड़ा विरोध जताया है, जिसमें उनके संगरोध पीरियड को खत्म किया गया है। प्रदेश महासचिव डा. पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि सरकार को इस महामारी के समय में इस तरह के आदेश, जो कि दूसरे प्रदेशों में या दूसरी बड़े शहरों में जारी हो रहे हैं, उनका अनुसरण करने से बचना चाहिए। यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है और हमारे कोरोना वारियर्स के लिए दुखदाई है कि सरकार 10 दिन लगातार कोविड वार्ड में ड्यूटी देने के बाद सात दिन के आइसोलेशन के पीरियड को खत्म कर रही है, जो कि इस समय बहुत ही गलत निर्णय है। चिकित्सक, स्टाफ नर्सेज अन्य पैरामेडिकल स्टाफ 10 दिन एक बहुत ही बड़े वायरल लोड के वातावरण के अंदर काम कर रहे हैं और इसलिए उसके बाद उनको आइसोलेशन पीरियड वैसे ही जारी रहना चाहिए जैसे पहले था। हिमाचल प्रदेश मेडिकल अफसर इस अधिसूचना का विरोध करती है और इस विरोध में हमारे साथ प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डाक्टर संघ उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

अगर इस अधिसूचना को तीन दिन के भीतर वापस नहीं लिया जाता है, तो पूरे प्रदेश के चिकित्सक काले बिल्ले लगाकर इसका विरोध करेंगे। इसलिए सरकार इस मसले पर गंभीरता पूर्वक विचार करें और इस अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए। संघ ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले में वे खुद विशेष रूप से हस्तक्षेप कर पुनर्विचार कर इस अधिसूचना को जल्द से जल्द रद्द करवा कर कोरोना वॉरियर्स के मनोबल को बढ़ाएं। सरकार का कहना है कि इनको दोनों वैक्सीन की डोज लग चुकी है। इसलिए आप तब तक काम करते रहें, जब तक आप का शरीर संक्रमित नहीं हो जाता, जो कि एक बहुत ही असंवेदनशील और मानवीय मूल्यों के हितों के विरोधात्मक तर्क है। सरकार कहती है कि एम्स दिल्ली में इस तरह की व्यवस्था है। श्री वर्मा ने प्रदेश सरकार से पूछा कि, एम्स दिल्ली में तो और भी बहुत सारी व्यवस्थाएं हैं। एम्स स्वास्थ्य संस्थान अपने हर चिकित्सक और पैरा मेडिकल स्टाफ को आवासीय सुविधा परिसर में उपलब्ध करवाता है, क्या हिमाचल में भी सरकार ऐसा कर रही है।

जान बचाने को कई दे चुके हैं आहुति

संघ ने कहा कि सबसे ज्यादा जो मृत्यु दर है, वह कोरोना वारियर्स और उनकी परिवारों के सदस्यों की है। पूरे देश में आज तक 750 से ऊपर चिकित्सक और 1200 से ऊपर पैरामेडिकल स्टाफ अपनी जान की आहुति इस महामारी के साथ लड़ाई में अपने प्रदेश और देश के लोगों की जान बचाने के लिए दे चुके हैं। सरकार इस बात की गारंटी दे सकती है कि कोरोना वॉरियर्स को वैक्सीन लगने के बाद वह कोरोना से संक्रमित नहीं होंगे और हुए तो क्या उनका और उनके परिजनों का पूरा ख्याल रखेगी

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