डलहौजी: एक दर्जन डॉक्टर होते हुए नही हुआ महिला का प्रसव, 16 किमी दूर गाड़ी में दिया बच्चे को जन्म

बनीखेत (चंबा)। एक दर्जन डॉक्टर होते हुए भी सिविल अस्पताल डलहौजी में आठ माह की गर्भवती का प्रसव नहीं किया गया। प्रसव करवाने की बजाय डॉक्टरों ने उसे स्त्री विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह दी।

जबकि, चंबा जिले के सरकारी अस्पतालों में स्त्री विशेषज्ञ नहीं हैं। बिना इलाज लौट रही गर्भवती ने 16 किलोमीटर दूर बच्चे को गाड़ी में ही जन्म दे दिया। जैसे-तैसे महिला और नवजात को पठानकोट के निजी अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा दोनों को अस्पताल में भर्ती कर लिया। नवजात को वेंटिलेटर में रखा गया है।

महिला के पति राकेश कुमार ने बताया कि डलहौजी अस्पताल में डॉक्टर चाहते तो उनकी पत्नी का आसानी से प्रसव हो सकता था। लेकिन, उन्होंने प्रसव करवाने की जहमत ही नहीं उठाई। जांच के लिए पहले पौने घंटे तक अस्पताल में बैठाए रखा। उसके बाद बिना इलाज किए वहां से लौटा दिया।

उन्होंने बताया कि जब वह पत्नी का प्रसव करवाने के लिए अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से कहने लगे तो उन्हें जवाब मिला कि प्रसव करवाने वाले चिकित्सक शाम चार बजे के बाद चले जाते हैं। वहीं, प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला की किसी डॉक्टर ने सुध नहीं ली।

मरीज की पर्ची तक नहीं बनाई गई। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आती है। जो महिला गाड़ी में बच्चे को जन्म दे सकती है, उसका सिविल अस्पताल में प्रसव क्यों नहीं किया जा सका?

सिविल अस्पताल डलहौजी में पत्नी को उपचार न मिलने से आहत राकेश कुमार उसे टांडा या पठानकोट तक नहीं ले जा सका। ऐसे में मोरनु पंचायत की पूर्व प्रधान अंजू देवी ने गर्भवती की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाए।

एसएमओ डॉ. विपिन ठाकुर ने बताया कि इसको लेकर जब ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से पूछा गया तो उसने बताया कि महिला को ब्लीडिंग ज्यादा हो रही थी। उसी दौरान अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीज भी लाया गया था। इस कारण महिला को प्रसव के लिए दूसरे संस्थान में ले जाने के लिए कहा गया। सभी मरीजों का इलाज करने के लिए चिकित्सकों को विशेष आदेश दिए गए हैं।

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