2023 में दुबई में होगा COP28 सम्मेलन, 140 देशों के प्रमुखों समेत 80,000 प्रतिनिधि होंगे शामिल

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दुबई(पीटीआई): अगले साल दुबई में COP28 सम्मेलन आयोजित होगा. यूनाइटेड अरब अमीरात के जलवायु परिवर्तन के लिए विशेष दूत सुल्तान अहमद अल जाबेर ने मंगलवार को कहा है कि 140 से अधिक राज्य प्रमुखों और सरकार के नेताओं सहित 80,000 से अधिक प्रतिनिधि, COP28 में भाग लेंगे.

उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री और जलवायु परिवर्तन के लिए यूएई के विशेष दूत अल जाबेर ने पार्टियों के सम्मेलन की मेजबानी करने वाले यूएई के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि सीओपी28 देश के राष्ट्रीय दिवस के साथ एक महत्वपूर्ण वैश्विक कार्यक्रम होगा जो एक्सपो सिटी दुबई में आयोजित किया जाएगा.

अल जाबेर ने कहा, ‘यह 5,000 से अधिक मीडिया पेशेवरों सहित उच्च-स्तरीय भागीदारी का स्वागत करेगा.’ यूएई ने वैश्विक देशों के साथ अपने मजबूत राजनयिक संबंध और जलवायु कार्रवाई पर व्यावहारिक स्थिति, ऊर्जा और स्थिरता क्षेत्रों में सिद्ध अनुभव के आधार पर 2021 में 2023 में इस सम्मेलेन की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति हासिल की.

अल जाबेर ने कहा कि यूएई पेरिस समझौते की पुष्टि करने वाला और 2050 तक नेट जीरो हासिल करने के लिए रणनीतिक पहल की घोषणा करने वाला पहला देश है. यूएई अंतरराष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी के मुख्यालय की भी मेजबानी करता है. यूएई ने 40 विकासशील देशों सहित 70 देशों में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है और हाल ही में स्वच्छ ऊर्जा (पेस) में संक्रमण को गति देने के लिए यूएई-यूएस साझेदारी की भी घोषणा की है. उन्होंने कहा, “सीओपी बातचीत के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और जलवायु कार्रवाई में प्रगति का आकलन करने के लिए प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने के लिए एक वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सामाजिक मंच है.”

बता दें कि 2022 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन या UNFCCC के दलों का सम्मेलन, जिसे आमतौर पर COP27 के रूप में जाना जाता है, यह 27वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन था, जो 6 नवंबर से 18 नवंबर 2022 तक मिस्र के शहर शर्म अल शेख में आयोजित किया गया था. सम्मेलन को एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया ताकि भाग लेने वाले देश एक आम सहमति पर पहुंचें जो इस बार एक ऐतिहासिक सौदा रहा, जो अमीर देशों के कार्बन प्रदूषण से खराब मौसम के शिकार होने वाले गरीब देशों को मुआवजा देने के लिए एक कोष तैयार करना था.

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