जजों की नियुक्ति के लिए MOP पर नहीं बन रही सहमति, सात वर्षों के बाद भी स्थिति वैसी की वैसी

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सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति के लिए सात साल में भी मेमोरेंडम आफ प्रोजीसर (एमओपी) पर सहमति नहीं बनने पर संसदीय समिति ने हैरानी जताई है। कानून और न्याय और कार्मिक पर विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि वह सरकार और न्यायपालिका से संशोधित एमओपी को अंतिम रूप देने की उम्मीद करती है, जो अधिक पारदर्शी हो।

वर्ष 2015 में सरकार से कहा था, कोलेजियम के परामर्श से तैयार करें MOP

कोलेजियम व्यवस्था में सुधार के लिए एमओपी को तैयार किया जाना है। भविष्य में इसी एमओपी के मुताबिक शीर्ष अदालत और 25 हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण किया जाना है। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा, समिति यह जानकर हैरान है कि एमओपी को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच सात साल से विचार विमर्श चल रहा है।

नहीं बन सकी आम सहमति

इसके बावजूद संवैधानिक अदालतों (सुप्रीम कोर्ट और 25 हाई कोर्ट) में जजों की नियुक्ति के लिए मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर (एमओपी) में संशोधन पर आम सहमति नहीं बन सकी है। सुप्रीम कोर्ट और 25 हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली को समाप्त करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक और एक संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक लाया था।

2015 से एनजेएसी कानून और संविधान संशोधन अधिनियम किया गया था लागू

इन दोनों को संसद ने लगभग सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। सरकार ने 13 अप्रैल 2015 से एनजेएसी कानून और संविधान संशोधन अधिनियम लागू किया। दोनों कानूनों को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी, जिसने उन्हें रद कर दिया, इस प्रकार कोलेजियम प्रणाली फिर लागू हो गई। इसके बाद दिसंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि पात्रता मानदंड, पारदर्शिता, सचिवालय की स्थापना और शिकायतों से निपटने के लिए तंत्र को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत के कोलेजियम के परामर्श से एमओपी को अंतिम रूप दिया जाए।

समिति की रिपोर्ट

विभिन्न हाई कोर्टों में रिक्तियों का उल्लेख करते हुए समिति की रिपोर्ट ने न्याय विभाग द्वारा प्रदान किए गए विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में हाई कोर्ट कोलेजियम द्वारा 251 सिफारिशें की गई थीं। 26 मई 2022 तक इन 251 सिफारिशों में से 148 नियुक्तियां विभिन्न हाई कोर्टों में की गईं, 74 नामों की सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा अनुशंसा नहीं की गई और तदनुसार संबंधित हाई कोर्टों को भेज दिया गया। शेष 29 प्रस्ताव सरकार और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के बीच प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।

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