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Wednesday, February 8, 2023
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कॉलेजियम vs सरकार: केंद्र ने SC की दोबारा सिफारिश वाले पांच नामों को नहीं बनाया जज

सरकार ने सीनियर एडवोकेट नीला केदार गोखले को बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नीला गोखले के साथ जिन और नामों को मंजूरी मिली है, उनमें पी वेंकट ज्योरिर्मयी और वी गोपालकृष्ण राव को आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त किया है, लेकिन सरकार ने उन पांच जजों की नियुक्ति पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है, जिनकी सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दोबारा की थी.

इनमें तीन नामों में सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट, वकील सोमशेखर सुंदरेशन को बॉम्बे हाई कोर्ट और वकील आर जॉन सत्यन को मद्रास हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश दो बार भेजते समय खुफिया रिपोर्ट का खुलासा कर उनको दरकिनार करने की वजह भी बताई है.

खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर सरकार को आपत्ति

खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर तो सरकार भी तिलमिलाई हुई है. केंद्रीय कानून मंत्री ने तो इसे गंभीर मानते हुए चीफ जस्टिस के साथ चर्चा करने की बात भी कही है. कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश के साथ तीन पन्ने का नोट भी सरकार को भेजा है. नोट में लिखा है कि अगर सौरभ कृपाल के समलैंगिक पार्टनर विदेशी नागरिक हैं तो क्या हो गया? देश में कितने ही लोग उच्च संवैधानिक पदों पर रहे हैं, जिनके जीवन साथी विदेशी नागरिक रहे हैं, तब तो किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई.

नामों पर सरकार को आपत्ति, कॉलिजयम ने दिया यह तर्क

वकील सोमशेखर सुंदरेशन के सरकार विरोधी ट्वीट और ब्लॉग लिखना तब तक कोई मायने नहीं रखता जब तक वो जज जैसे संवैधानिक पद पर न आएं. मद्रास हाई कोर्ट के लिए आर जॉन सत्यम की सिफारिश दोबारा करने के पीछे भी खुफिया रिपोर्ट की आपत्तियों का उल्लेख करते हुए उसकी भी काट में कॉलेजियम ने जवाब लिखा कि नीट परीक्षा में फेल हुई छात्रा की आत्महत्या के बाद सरकार के खिलाफ लिखना उनकी पेशेवर छवि के खिलाफ नहीं है.

हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादले की सिफारिशें करने वाले सुप्रीम कोर्ट के शीर्षस्थ तीन जजों के कॉलेजियम ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA की आलोचना वाले पोस्ट सोशल मीडिया पर डालने और बयान देने वाले एडवोकेट सोमशेखर सुंदरेसन को भी बॉम्बे हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश दोहराई. वकील सोमशेखर सुंदरेसन को नियुक्त करने की सिफारिश पिछले साल भी की गई थी. कॉलेजियम ने कहा कि सोशल मीडिया पर अपने विचारों के प्रदर्शन से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि वह अत्यधिक पक्षपाती विचारों वाला है.

कॉलेजियम ने दोबारा भेजी अपनी सिफारिशी टिप्पणी में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का हवाला देते हुए लिखा कि इस प्रावधान के तहत सभी नागरिकों को बोलने और अपने विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है.

किसी पद के लिए लायक उम्मीदवार का अपने विचारों की स्वच्छंदता से अभिव्यक्ति करना, उसे किसी संवैधानिक पद धारण करने से वंचित नहीं कर सकता. उसका यह कृत्य तब तक आपत्तिजनक नहीं हो सकता, जब तक कि वो जज पद के लिए प्रस्तावित न हो जाए.

सोमशेखर सुंदरेसन की 2021 में की गई थी सिफारिश

बॉम्बे हाई कोर्ट कॉलेजियम ने 4 अक्टूबर 2021 को एडवोकेट सोमशेखर सुंदरेसन के नाम की सिफारिश की थी. उसके करीब चार महीने बाद 16 फरवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के लिए सोमशेखर सुंदरेसन के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी. सरकार ने नौ महीने बाद 25 नवंबर, 2022 को इस पर पुनर्विचार का आग्रह करते हुए कॉलेजियम को लौटा दिया था. केंद्र की आपत्ति यह थी कि उन्होंने कई मामलों पर सोशल मीडिया में अपने विचार प्रसारित किए हैं जो अदालतों के विचाराधीन विषय हैं. हालांकि, सोमशेखर सुंदरेसन के नाम को दोहराते हुए कॉलेजियम ने कहा कि जिस तरह से उम्मीदवार ने अपने विचार व्यक्त किए हैं, वह इस अनुमान को सही नहीं ठहराता है कि वह अत्यधिक पक्षपाती विचारों वाले हैं या वह सरकार की महत्वपूर्ण नीतियों, पहलों और निर्देशों पर सोशल मीडिया पर चुनिंदा तौर पर आलोचनात्मक रहे हैं.

इसके अलावा संबंधित एजेंसी के पास यह बताने को न ही कोई ठोस और पर्याप्त सामग्री है कि उम्मीदवार के भाव किसी भी राजनीतिक दल के साथ मजबूत वैचारिक झुकाव के साथ उसके संबंधों का संकेत देते हों, क्योंकि जजों के लिए योग्यता और अर्हता में एक मानदंड यह भी है कि राजनीतिक न हो.

इसमें कॉलेजियम ने कहा है कि एडवोकेट सुंदरेसन ने वाणिज्यिक कानून में विशेषज्ञता हासिल की है. यह खासियत बॉम्बे हाई कोर्ट के लिए एक खासियत होगी, जहां न्यायिक नजरिए से अन्य शाखाओं के अलावा वाणिज्यिक और प्रतिभूति कानूनों के मामले बड़ी मात्रा में हैं, इसलिए कॉलेजियम बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सोमशेखर सुंदरेसन की नियुक्ति के लिए 16 फरवरी 2022 की अपनी सिफारिश को दोहराने का प्रस्ताव करता है.

पीएम की आलोचना वाले सत्यन के नाम पर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजयम ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए तमिलनाडु के वकील आर जॉन सत्यन को मद्रास हाई कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश दोहराई. पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना वाले उनके आर्टिकल को साझा करने और NEET परीक्षा में फेल होने पर मेडिकल छात्रा अनीता द्वारा आत्महत्या करने पर एक पोस्ट करने की आपत्ति भी कॉलेजियम ने खारिज करते हुए सत्यन को जज बनाने की दोबारा सिफारिश की है.

कॉलेजियम ने कहा है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने बताया है कि उनकी छवि साफ सुथरे और अच्छे पेशेवर व्यक्तिगत की है. रिपोर्ट में तो उनकी सत्यनिष्ठा के खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल नहीं आया है. सत्यन ईसाई समुदाय से हैं.

आईबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है और इस पृष्ठभूमि में उनके द्वारा किए गए पोस्ट के संबंध में उनकी उपयुक्तता, चरित्र या सत्यनिष्ठा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, इसलिए कॉलेजियम 16 फरवरी 2022 की अपनी सिफारिश को दोहराता है. कॉलेजियम ने आगे सिफारिश की है कि मद्रास हाई कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए इस कॉलेजियम द्वारा अलग से अनुशंसित कुछ नामों पर न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के मामले में उन्हें वरीयता दी जाए.

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