पाकिस्तान में चीनी कंपनी ने हजारों लोगों को 2020 से बना रखा है बंधक, सेना की मदद से चल रहा यह कृत्य

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पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में चीनी कंपनी द्वारा बहु-अरब डॉलर के बिजली संयंत्र में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों को 2020 से ही बाहर निकलने पर प्रतिबंध झेलना पड़ रहा है.

अगर यहां से कोई निकलने में कामयाब हो भी जाए तो उसकी दोबारा एंट्री प्रतिबंधित कर दी जाती है. आरोप है कि चीन की कठोर कोविड नीति पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की मदद से लागू की जा रही हैं.

प्रोजेक्ट पर काम करने वाले एक पाकिस्तानी इंजीनियर युसूफ ने कहा, हमें घर जाने, अपने प्रियजनों से मिलने, अपने धार्मिक या सांस्कृतिक त्योहारों को मनाने या आगे की शिक्षा हासिल करने की अनुमति नहीं है.

उन्होंने कहा, हम में से कई लोग परेशान होकर आत्मघात पर विचार कर चुके हैं. हमारे साथ कैदियों जैसा व्यवहार होता है.उन्होंने अफसोस जताया कि हमें अपने ही देश में आजादी नहीं है.

कोविड नीति को बिजली संयंत्र में कितनी सख्ती से लागू किया जा रहा है, उसे इससे भी समझा जा सकता है कि कंपनी बीमार श्रमिकों के इलाज के लिए किसी भी स्थानीय डॉक्टर पर भरोसा नहीं करती. कंपनी का कहना है कि पाकिस्तानी डॉक्टर कोविड प्रतिबंधों को गैर जरूरी बताते हैं.

विश्व की सबसे बड़ी बिजली निर्माता कंपनी पॉवरचाइना, जो वैश्विक स्तर पर 80 सहायक कंपनियों के साथ संयंत्र का संचालन रही है और ऑस्ट्रेलिया में तस्मानिया के कैसल हिल विंड फार्म के साथ काम करती है.

पावर चाइना ने पाकिस्तान के नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथॉरिटी को लिखे एक पत्र में स्वीकारा है कि परियोजना प्रबंधन ने मार्च 2020 से संयंत्र में तालाबंदी की हुई है.

साथ ही यह भी बताया कि इसने कर्मचारियों को नियमित रूप से संयंत्र में प्रवेश करने या छोड़ने की अनुमति दी हुई है. इसमें छुट्टियां भी शामिल हैं.

साथ ही पत्र में यह भी कहा गया कि स्थिति पर बेहतर काबू के लिए लॉकडाउन सबसे प्रभावी उपाय है. इससे कम लागत में महामारी नियंत्रण में रहता है.

पावर चाइना की स्थानीय सहायक कंपनी के प्रशासनिक विभाग के निदेशक झाओ ताओ ने इस मामले में खोजबीन करने वाले एबीसी डॉट नेट डॉट एयू को बताया कि कंपनी कर्मचारियों को अंदर रहने के लिए अतिरिक्त बोनस देती है.

झाओ ने कहा, हम अपने श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए शून्य-कोविड नीति लागू करने पर अमल करते हैं.उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि पाकिस्तान में चीनी कंपनी द्वारा संचालित कोयले से चलने वाला बिजली संयंत्र लॉकडाउन में भी काम करता रहा.

चीनी कंपनियों की नीति

बीजिंग की घरेलू शून्य कोविड नीति के परिणामस्वरूप शंघाई और चेंगदू जैसे महानगरों में लाखों लोग अभी भी तालाबंदी के शिकार हैं.हालांकि, पॉवरचाइना का यह तरीका पाकिस्तान के स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के विपरीत है. पाकिस्तान ने इस साल मार्च में ही अपने सभी कोविड-19 प्रतिबंध हटा दिए हैं.

चीन की बीआरआई एक महत्वाकांक्षी विदेश और आर्थिक नीति है, जिसका उद्देश्य छह आर्थिक गलियारों में सैकड़ों बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और संसाधन परियोजनाओं के माध्यम से बीजिंग के आर्थिक प्रभुत्व को मजबूत करना है.

ट्रिलियन-डॉलर की मदद से चीन की इस विदेश नीति को 146 देशों में विस्तार दिया जा रहा है. जांच से पता चला है कि दुनिया भर में परियोजनाओं को चलाने वाली कम से कम तीन चीनी कंपनियां अभी भी कोविड-19 नीतियों का सख्ती से पालन कर रही हैं.

पाकिस्तान में चीन की एक अन्य बीआरआई परियोजना, बलूचिस्तान में सैंदक कॉपर-गोल्ड माइन है, जिसमें कम से कम 1,000 श्रमिक चीनी कंपनी एमसीसी रिसोर्सेज डेवलपमेंट लिमिटेड के लिए काम करते हैं.

उनपर भी पिछले कई महीनों से खदान साइट छोड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ है.इससे गुस्साए श्रमिकों के परिवार के सदस्य, जिसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे ने मार्च में विरोध-प्रदर्शन किया था.

इसके बावजूद खदान ने कोविड प्रतिबंध नहीं हटाया गया है. एक साल पहले इसी तरह जिम्बाब्वे में ऊर्जा कर्मचारियों ने कोविड-19 नीति को लेकर पावर चाइना की सहायक कंपनी, ह्वांगे के खिलाफ विरोध जताया था. यहां यह कंपनी कोयले से संचालित सिनोहाइड्रो बिजली संयंत्र का संचालन करती है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के एक वरिष्ठ चीन शोधकर्ता वांग यी किउ का कहना है कि विशेषज्ञों की राय में बीजिंग की कोविड-19 नीति ‘अपमानजनक’ , कठोर और अमानवीय व्यवस्था है.’

वांग ने कहा, जहां भी बीआरआई परियोजनाएं चल रही हैं, वहां के श्रमिकों को इसके खिलाफ बोलना चाहिए. चाहे वे चीनी हों या अपने देश के नागरिक हों.

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