World Richest Country: चीन ने अमेरिका को पछाड़ा; 20 साल में दुनिया की संपत्ति 3 गुना पर चीन की संपत्ति 16 गुना बढ़ी

Worlds Richest Country: संपत्ति के मामले में अब तक अमेरिका सबसे आगे था, लेकिन अब चीन ने अमेरिका से यह तमगा छीन लिया है। जी हां, संपत्ति के मामले में अब चीन दुनिया का नंबर एक देश बन गया है। 20 साल में इसकी संपत्ति 7 खरब डॉलर थी जो अब 120 खरब डॉलर हो गई।

अब तक अमेरिका संपत्ति के मामले में सबसे आगे था, लेकिन अब चीन ने अमेरिका से यह तमगा छीन लिया है। जी हां, संपत्ति के मामले में अब चीन दुनिया का नंबर एक देश बन गया है। चीन ने अमेरिका को पछाड़कर दो दशकों के भीतर अपनी संपत्ति में इजाफा कर शीर्ष स्थान हासिल किया है। 

दो दशक में तीन गुना बढ़ी वैश्विक संपत्ति 
पिछले दो दशकों में वैश्विक संपत्ति तीन गुना हो गई है, जिसमें चीन सबसे आगे है। चीन ने दुनिया भर में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अमेरिका (यूएस) को पीछे छोड़ दिया है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की कुल संपत्ति का लगभग एक तिहाई हिस्सा चीन के पास है। 

चीन की आर्थिक वृद्धि में जोरदार बढ़ोतरी
विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने से एक साल पहले वर्ष 2000 में इसकी संपत्ति केवल सात खरब डॉलर थी, जो अब बढ़कर 120 खरब डॉलर हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की आर्थिक वृद्धि में लगातार तेजी आई है। 20 साल की अवधि में दुनिया ने जितनी संपत्ति अर्जित की, उसमें करीब एक-तिहाई हिस्सा चीन का ही है।

10 देशों पर केंद्रित रिपोर्ट में खुलासा
दुनिया की 60 फीसदी आमदनी के लिए जिम्मेदार 10 देशों की बैलेंसशीट पर नजर रखने वाली मैनेजमेंट कंसल्टेंट मैकिन्से एंड कंपनी की अनुसंधान शाखा की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। दरअसल, मैनेजमेंट कंसल्टेंट मैकिन्से विश्व आय के 60 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करने वाले दस देशों की राष्ट्रीय बैलेंस शीट की जांच करता है। इसका मुख्यालय ज्यूरिख में है। रिपोर्ट में बताया गया दुनिया भर में कुल संपत्ति वर्ष 2000 में 156 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2020 में 514 ट्रिलियन डॉलर हो गई है।

अमेरिका के नीचे आने का यह रहा कारण
अमेरिका की संपत्ति में भी जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। यूएस की संपत्ति बीते 20 सालों दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई है। साल 2000 में अमेरिकी संपत्ति 90 खरब डॉलर थी। रिपोर्ट का कहना है कि यहां प्रॉपर्टी के दामों में बहुत ज्यादा वृद्धि न होने से अमेरिकी की संपत्ति चीन के मुकाबले कम रही। यही कारण है कि अमेरिका नंबर एक के पायदान से खिसक गया और यह तमगा अब चीन के नाम हो गया। 

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