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तीन महीने बाद निर्णायक बढ़त की ओर बढ़ा रूस, हार की दहलीज पर खड़ा यूक्रेन

RIGHT NEWS INDIA: यूक्रेन युद्ध के तीन महीने बीतने के बाद आखिरकार रूस को युद्ध में निर्णायक बढ़त मिलती दिख रही है और करीब तीन महीने के कठिन संघर्ष के बाद यूक्रेन युद्ध में ना सिर्फ हार की तरफ बढ़ रहा है, बल्कि ऐसा लगने लगा है, कि यूक्रेन अब अपना पूर्वी हिस्सा गंवा देगा।

तीन महीने के बाद युद्ध एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और उनके टॉप कमांडर के पास दो ही ऑप्शन बचे हैं, या तो वो अपने सैनिकों को डोनबास से पीठ दिखाकर वापस आने के लिए कहे, या फिर उन्हें मौत के मुंह में झोंक दें।

युद्ध पर यूक्रेनी जनता की राय

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने यूक्रेन पर 24 फरवरी को रूसी आक्रमण के बाद एक सुप्रीम लीडर की तरह सामने आये और एक नायक की तरह उभरे, जिन्होंने जान की परवाह किए बगैर ना सिर्फ अपनी सेना का नेतृत्व किया, बल्कि रूस की बार बार धमकियों के बाद भी राजधानी कीव नहीं छोड़ा। लेकिन, अब जबकि पूर्वी यूक्रेन पर रूसी पूरी तरह से शिकंजा कस चुका है और जेलेंस्की के बाद दो विकल्पों के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचे हैं, फिर भी देश की जनता किसी भी हालत में यूक्रेन की एक इंच जमीन रूस को सौंपने के लिए तैयार नहीं हैं। 24 मई को यूक्रेन में एक जनमत सर्वेक्षण करवाया गया, जिसमें पूर्वी यूक्रेन के 68 प्रतिशत नागरिकों ने और दक्षिणी यूक्रेन के 83 प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर कहा, कि शांति के बदले यूक्रेन की जमीन रूस को किसी भी हाल में नहीं सौंपा जाना चाहिए।

अमेरिकी नेता को लगाई फटकार

इस सर्वे के दौरान यूक्रेन के लोगों ने अमेरिका के वरिष्ठ राजनेता हेनरी किसिंजर को जमकर फटकार लगाई है, जिन्होंने सुझाव दिया था, कि यूक्रेन शांति वार्ता के बदले में कुछ क्षेत्र छोड़ दें। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस सवाल को लेकर कहा कि, ‘किसिंजर का “कैलेंडर 2022 का नहीं है, बल्कि 1938 है।” ज़ेलेंस्की ने द्वितीय विश्व युद्ध की अध्यक्षता करने वाले सुडेटेनलैंड में नाजी जर्मनी पर हमला करने के लिए की गई क्षेत्रीय रियायतों का जिक्र करते हुए हेनरी किंसजर की जमकर आलोचना की है। हालांकि, जेलेंस्की ने हेनरी के बयान पर कड़ी आपत्ति भले ही जताई हो, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के डोनबास में अब लड़ाई जिस स्तर तक पहुंच हई है, उस कठोर सत्य को जेलेंस्की को मानना ही होगा।

रूस ने तेज की ऑपरेशन की रफ्तार

एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कल तक इस क्षेत्र में लगभग 40 बस्तियों पर हमले हो रहे थे और रूसी सेना पिछले एक सप्ताह से युद्ध की रफ्तार काफी तेज कर दी है। जबकि यूक्रेन की सेना के हौसले अब टूटने लगे हैं, और वह अब अत्यधिक संकट का सामना कर रही है। यूक्रेन की उप रक्षा मंत्री हन्ना मलयार ने कहा कि डोनबास में लड़ाई “अधिकतम तीव्रता” से चल रही है।

यूक्रेन की अनिश्चित स्थिति

ऐसे कई संकेत हैं कि लड़ाई रूस के पक्ष में चील गई है, जिसमें यूक्रेनी नेताओं के तीखे बयानों से लेकर नक्शे स्थिति बदलने की जमीनी रिपोर्ट तक शामिल हैं। छह सप्ताह की भारी लड़ाई के बाद, डोनबास में शंकु के आकार का यूक्रेनी मोर्चा अब ढहने के कगार पर पर चुका है, वहीं, रूस ने तीन तरह से डोनबास को पूरी तरह से घेर लिया है। वहीं, रूस ने स्थिति को और भी खतरनाक कर दिया है और हमले की तीव्रता काफी बढ़ा दी है। वहीं, अब यूक्रेनी सेना के लिए एकमात्र उम्मीद तेजी से युद्धक्षेत्र में आत्मसमर्पण कर बाहर निकलना है, या फिर लड़ाई लड़ते हुए मारा जाना है। सबसे खतरनाक स्थिति पूर्वी यूक्रेनी शहर सेवेरोडनेत्स्क और लिसिचन्स्क में है।

अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?

यूएस स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने 26 मई की रिपोर्ट में चेतावनी दी है, कि, “रूसी सेना ने सेवेरोडोनेट्सक के आसपास काफी सख्त नियंत्रण स्थापित कर लिया है और रूसी सेना अभी भी लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिनों में सेवेरोडोनेट्स्क-लिसीचांस्क क्षेत्र पर पूरी तरह से रूस का नियंत्रण होने की संभावना है। कथित तौर पर इस क्षेत्र की रक्षा दो ब्रिगेड के सैनिकों द्वारा की जाती है। सेवेरोडोनेट्सक शहर, जिसकी युद्ध से पहले की आबाजी एक लाख के करीब थी, वहां की जनसंख्या अब सिर्फ 15 हजार हगी रह गई है। वहीं, रूसी सेना इस बिंदु पर आगे बढ़ी है कि वे शहर की मोर्टार सीमा के भीतर हैं। 82 मिमी मोर्टार की सीमा 3,000 – 5,000 मीटर है, जिसका अर्थ है कि शहर अब पैदल सेना के हमले के सीधे खतरे में है। सेवरोडोनेत्स्क शहर की स्थिति काफी ज्यादा नाजुक इसलिए भी हो गई है, क्योंकि सेवरोडोनेत्स्क को यूक्रेन से जोड़ने के लिए एक पुल है, जो अब खतरे में है। स्काई न्यूज की एक टीम ने आज के बुलेटिन में शहर के अंदर से इसकी सूचना दी है।

अगल पुल टूटा तो क्या होगा?

ये पुल रूस और यूक्रेन, दोनों के ही लिहाज से काफी अहम है, इसीलिए अभी तक इस पुल को उड़ाने की कोशिश नहीं की गई है। इस पुल के जरिए ना सिर्फ दोनों सेनाओं के लिए हथियारों की आपूर्ति होती है, बल्कि इसी पुल के जरिए घायलों को भी निकाला जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर इस पुल के पीछे यूक्रेनी सेना को धकेलने की कोशिश होती है, तो इस स्थिति में ये पुल एक घातक चोक प्वाइंट बन सकता है। वहीं, ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों ने भी आखिरकार अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा है कि, पोपसना के पास कई गांवों पर रूस ने जब्ती कर लिया है। वहीं, अब पूरी संभावना है, यूक्रेन युद्ध में आखिरी जीत रूस की ही हो।