दिल्ली में मानव तस्करी के मामलों में 73.5 प्रतिशत की वृद्धि, एनसीआरबी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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दिल्ली: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक 2021 में आठ केंद्रशासित प्रदेशों में से दिल्ली में मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले दर्ज किए और 2020 की तुलना में इसमें 73.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में मानव तस्करी के सभी 509 पीड़ितों को बचा लिया गया।

मानव तस्करी से पीड़ित अधिकतर लोग बंधुआ मजदूरी से जबकि उनमें से कुछ मामले यौन शोषण व छोटे अपराधों से जुड़े थे। हालांकि, पीड़ितों में से किसी की भी बच्चों से जुड़ी अश्लील फिल्मों (चाइल्ड पोर्नोग्राफी), भीख मांगने या मानव अंगों को हटाने के लिए तस्करी नहीं की गई थी।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2020 में देश भर में कई बार कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन लागू किया गया। उन्होंने कहा, “स्वाभाविक रूप से नगर में 2021 में मानव तस्करी के मामलों में वृद्धि देखी गई, जब लोगों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हुई।” उन्होंने कहा, ”पलायन भी एक प्रमुख कारण है।

नौकरियों के अवसरों के लिए एक प्रमुख केंद्र होने के नाते, कुछ डीलर युवाओं और बेरोजगार लोगों को लुभावने लालच देकर आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, गंतव्य तक पहुंचने के बाद उन्हें वास्तविकता का पता चलता है। या तो उन्हें बिल्कुल ही भुगतान नहीं किया जाता या जितना वादा किया गया था उससे बहुत कम भुगतान किया जाता है।”

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 509 लोगों की तस्करी की गई जिनमें से ज्यादातर पुरुष और 143 महिलाएं थीं। दिल्ली में मानव तस्करी के शिकार 437 पीड़ित 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के थे, जिनमें 100 लड़कियां थीं। आंकड़ों के अनुसार 2021 में मानव तस्करी के आरोप में 174 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 13 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। हालांकि किसी को भी अदालतों ने दोषी या आरोपमुक्त नहीं ठहराया है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “अन्य राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में, दिल्ली में मामले तुरंत दर्ज किए जाते हैं। हमारे यहां शिकायतों के ऑनलाइन पंजीकरण की भी सुविधा है और हर शिकायत की सत्यता की जांच की जाती है और उसके हिसाब से कार्रवाई की जाती है।”

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