OBC की 18 जातियों को अनुसूचित जाति में किया जाएगा शामिल, बांटी गई मिठाइयां, जाने क्या है पूरा मामला

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अति पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 18 जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) की श्रेणी में शामिल करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के रोक का डॉ. भीमराव आंबेडकर ग्रंथालय व जनकल्याण गोरखपुर की कार्यकारिणी ने स्वागत किया है।

इसी सिलसिले में कार्यकारिणी के सदस्यों की बुधवार देर रात झारखंडी महादेव स्थित संस्था के मुख्यालय पर बैठक हुई। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया गया। साथ ही कहा गया कि एससी समाज के आरक्षण में सेंधमारी स्वीकार नहीं है। 17 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जीत मिली है। इसके लिए हाईकोर्ट व अधिवक्ताओं का आभार जताया गया।

ओबीसी को एससी में शामिल करने के फैसले को गोरखपुर की डॉ भीमराव आंबेडकर ग्रंथालय व जनकल्याण ने ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके अध्यक्ष हरिशरण गौतम हैं। वह वाणिज्यकर विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। संस्था की कार्यकारिणी 19 सदस्यीय है।

इसके महामंत्री एडवोकेट उदयचन्द राज ने बताया कि सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने ओबीसी की कई जातियों को एससी में शामिल करने का प्रयास किया था। इसे लेकर ही 2005 में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस फैसले पर पहले रोक लगाई थी। इसके बावजूद 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दोबारा आरक्षण में सेंधमारी का प्रयास किया।

इसपर भी हाईकोर्ट की रोक लगा दी, फिर भाजपा सरकार ने ओबीसी की 18 जातियों को एससी की श्रेणी में शामिल करने का फैैसला लिया। यह मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन था। अब फैसला गया है। इससे एससी समाज के लोग उत्साहित हैं। सबका कहना है कि अब किसी का हक नहीं मारा जाएगा। आरक्षण का पूरा लाभ मिलेगा।

राज्य सरकारें नहीं ले सकती हैं फैसला
महामंत्री ने कहा कि एससी में पहले ही 67 जातियां हैं। सबको मिलाकर 21 फीसदी आरक्षण मिलता है। ऐसे में 18 और जातियों को शामिल करने से आरक्षण कम हो जाएगा। समाज के लोगों को लाभ नहीं मिल पाएगा। पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल पाएगी। एससी का दर्जा देने का फैसला राज्य सरकारें नहीं कर सकती हैं। इसके लिए संविधान संशोधित करना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो आरक्षण का दायरा भी बढ़ाना पड़ेगा।

जाति की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों को झटका
जातियों की राजनीति करने वाले छोटे राजनीतिक दलों को बड़ा झटका लगा है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद लंबे समय से निषादों को एससी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इसी का हवाला देकर पहले सपा से हाथ मिलाया था, फिर भाजपा के सहयोगी बन गए। आरक्षण देने का दबाव भी बनाया था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने इस मंशा पर पानी फेर दिया। गोरखपुर व उसके आसपास के जिलों में मल्लाह, केवट, निषाद व मझवार की संख्या अच्छी है। इन सबको एससी की श्रेणी में शामिल करने का फैसला लिया गया था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।

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