Himachal News: हिमाचल प्रदेश में क्रिप्टो करेंसी के नाम पर लोगों को ठगने वालों पर कानून का शिकंजा कस गया है। विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने इस महाघोटाले के आरोपी सुरेंद्र कुमार नेगी को करारा झटका दिया है। अदालत ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। सुरेंद्र नेगी पर फर्जी वेबसाइट्स और एप्स के जरिए आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने का आरोप है। यह मामला पालमपुर पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। कोर्ट ने इसे समाज के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना है।
फर्जी कंपनियों का ऐसा था जाल
आरोपी सुरेंद्र कुमार नेगी ने कोरविओ (Corvio), वोस्क्रो (Voskro) और हाइपेनेक्स्ट (Hypenext) जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिये लोगों को फंसाया था। इन फर्जी क्रिप्टो करेंसी स्कीम्स में लोगों को मोटे मुनाफे का लालच दिया गया था। जांच में सामने आया है कि इसके जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है। इसमें जनता के पैसे की भारी क्षति हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दुबई भाग गया है मुख्य सरगना
न्यायाधीश ने जमानत खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आर्थिक अपराधों में जमानत देते समय राज्य की अर्थव्यवस्था और जनहित को ध्यान में रखना जरूरी है। सुरेंद्र नेगी की भूमिका इस घोटाले में बहुत सक्रिय रही है। उसके बाहर आने से गवाहों को डराने और जांच प्रभावित होने का खतरा है। वहीं, इस क्रिप्टो करेंसी घोटाले का मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा देश छोड़कर दुबई भाग चुका है। पुलिस अभी भी मामले की गहनता से जांच कर रही है।
