New Delhi News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने दुनिया भर के बाजारों को डरा दिया है। इसका सीधा असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है। बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। सप्लाई रुकने के डर से निवेशक घबराए हुए हैं और बाजार में भारी उठापटक जारी है।
लगातार तीसरे दिन आई तेजी
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने लंबी छलांग लगाई है। पिछले तीन दिनों से लगातार इसमें बढ़त देखने को मिल रही है। यह तेजी इतनी जबरदस्त है कि कीमतें पिछले डेढ़ साल के रिकॉर्ड को तोड़ चुकी हैं।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, यह उछाल सामान्य नहीं है। ब्रेंट क्रूड का 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचना चिंता का विषय है। इससे पहले कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी काफी समय पहले देखी गई थी। निवेशक अब हर पल बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं।
पश्चिम एशिया संकट बना वजह
कच्चे तेल में आए इस उबाल की मुख्य वजह पश्चिम एशिया का संकट है।
- इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
- निवेशकों को डर है कि युद्ध के हालात से तेल की सप्लाई चेन टूट सकती है।
- सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कीमतों को हवा दे दी है।
- बड़े तेल उत्पादक देशों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए अच्छी खबर नहीं हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा तेल बाहर से खरीदता है। अगर कीमतें इसी तरह ऊपर रहीं, तो देश का आयात बिल बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। तेल कंपनियों पर भी दाम बढ़ाने का दबाव बन सकता है।
महंगाई बढ़ने का खतरा
तेल की कीमतें बढ़ने से सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही महंगा नहीं होता है। इसका असर हर चीज पर पड़ता है। माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो वैश्विक महंगाई दर में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी हैं। बाजार में डर है कि अगर कोई बड़ा सप्लाई रूट बंद हुआ, तो कीमतें आसमान छू सकती हैं।

