भारत में बिना इजाजत घूंघट उठाने, कीचड़ में पत्थर मारने और धक्का देने पर दर्ज हो सकती है FIR, जानिए क्या है प्रावधान

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हमारी जिंदगी में आस पास या हमारे साथ बहुत सी छोटी-छोटी घटनाएं होती है और हम इन घटनाओं पर ध्यान ना देकर बहुत सामान्य सी बात समझकर छोड़ देते हैं लेकिन किसी भी आदमी के साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार के लिए भारतीय दंड संहिता,1860 में अपराध माना है। क्योंकि भारतीय संविधान में सभी को स्वतंत्रता, समानता और सम्मान का अधिकार दिया गया है, और अगर कोई व्यक्ति किसी की स्वतंत्रता में कोई रुकावट उत्पन्न करता है तो संविधान के उल्लंघन के चलते दण्ड संहिता में ऐसे अपराध के खिलाफ कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 349 :-

अगर कोई व्यक्ति अपने सामान्य बल के काऱण किसी व्यक्ति गतिमान, गति में परिवर्तन, गतिहीनता या किसी पदार्थ द्वारा गति में रुकावट उत्पन्न करना बल का अपराध होता है।

धारा 350 के अनुसार आपराधिक बल की परिभाषा:-

दण्ड संहिता की धारा 349 को स्पष्ट समझने के लिए धारा 350 की आवश्यकता है जानिए।

1. अगर कोई व्यक्ति नाव में बंधी हुई रस्सी को छोड़ दे उस नाव में कोई व्यक्ति बैठा है यह गतिमान का अपराध होगा।

2. कोई व्यक्ति घोड़े पर बैठ कर जा रहा है और अन्य व्यक्ति उस घोड़े को चावुक मार दे जिससे घोड़ा भावुक हो जाए और अपनी गति में परिवर्तन कर देता है तब यह गति-परिवर्तन का अपराध होगा।

3. कोई व्यक्ति पालकी या घोड़ा गाड़ी में बैठकर जा रहा है और अचानक कोई व्यक्ति आपराधिक उद्देश्य से उसको रोक दे तब यह गति-हीनता का अपराध होगा।

4. अगर कोई व्यक्ति सड़क पर चल रहा है और अन्य व्यक्ति आपराधिक उद्देश्य से उसे धक्का देता है तो यह गति में संस्पर्श का अपराध होगा।

5. अगर कोई व्यक्ति आपराधिक उद्देश्य से किसी गंदे पानी में पत्थर मरता है जिसके कारण किसी अन्य व्यक्ति असुविधा उत्पन्न हो गई है तो यह भी बल का अपराध होगा।

6. स्त्री की बिना इजाजत के किसी भी अन्य व्यक्ति द्वारा उसका घूंघट उठाकर देखना।

7. स्नान करने के पानी में आपराधिक उद्देश्य से उबला हुआ पानी डालना।

8. किसी व्यक्ति के ऊपर आपराधिक उद्देश्य से कुत्ते को झपटने के लिए भड़काना।

उपर्युक्त अपराध धारा 350 के अंतर्गत आपराधिक बल के अंतर्गत मान्य होंगे।

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