ऊना पुलिस को अवैध हिरासत मामले में कार्यवाही ना करना पड़ा भारी, हाई कोर्ट ने एसपी अर्जित सेन से मांगा जवाब

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मोहाली के एक कारोबारी के ड्राइवर को अवैध हिरासत में रखने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने एसपी ऊना और एसएचओ टाहलीवाल से 9 जनवरी तक जवाब तलब किया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। मोहाली के कारोबारी सोहन सिंह ने अपने ड्राइवर की अवैध हिरासत को लेकर आपराधिक याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऊना के बच्चन सिंह ने उसके ड्राइवर को बिना किसी कारण रोक रखा है।

अदालत को बताया गया कि उत्तर प्रदेश का रहने वाला लाल वर्मा वर्ष 2021 से उसकी गाड़ी चला रहा है। 2 जनवरी 2023 को याचिकाकर्ता ने अपने ड्राइवर को टाहलीवाल से रोपड़ भेजा था। लेकिन रास्ते में प्रतिवादी बच्चन सिंह ने ड्राइवर को पकड़ा और गाड़ी सहित अपने घर ले गया। आरोप लगाया गया है कि उसके बाद प्रतिवादी ने उसे अपने घर में अवैध तरीके से रोक रखा है। अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने उसी दिन पुलिस थाना टाहलीवाल में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। लेकिन एसएचओ की ओर से मामले की जांच करने में आनाकानी की जा रही है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि उसके ड्राइवर को अदालत के समक्ष पेश किए जाने के आदेश दिए जाएं।

नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी हाईकोर्ट से बरी
प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को दोषमुक्त किया है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने प्रार्थी को तुरंत प्रभाव से रिहा करने के आदेश पारित किए हैं। सत्र न्यायाधीश सोलन ने घनश्याम को नाबालिग से दुष्कर्म करने का दोषी पाया था। इसके लिए उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। नाबालिग की मां ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी पांच वर्षीय बच्ची के साथ उसके पिता ने दुष्कर्म किया है।

अभियोजन पक्ष ने प्रार्थी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व पॉक्सो अधिनियम की धारा-4 के तहत अभियोग चलाया था। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन पर पाया कि प्रार्थी शराब के नशे में शिकायतकर्ता को प्रताड़ित करता था। पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट और उसका बयान भी अभियोजन पक्ष के खिलाफ है। सिर्फ शिकायतकर्ता के बयान पर ही प्रार्थी को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि हो सकता है कि शिकायतकर्ता घरेलू हिंसा की वजह से प्रार्थी को फंसाना चाहती है। इस तरह की आशंका को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष प्रार्थी के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है।

बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग मामले पर सुनवाई 12 को
प्रदेश हाईकोर्ट ने बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग मामले पर सुनवाई 12 जनवरी निर्धारित की है। इस मामले में अदालत ने पिछले पांच वर्ष का रिकॉर्ड तलब किया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पूरा रिकॉर्ड पेश न किए जाने पर अदालत ने संबंधित विभाग को अतिरिक्त समय दिया है। पर्यटन विभाग के निदेशक ने अदालत को बताया है कि हिमाचल प्रदेश वायु क्रीड़ा नियमों को राष्ट्रीय वायु क्रीड़ा पॉलिसी के तहत बनाया जाएगा। साथ ही एक महीने के भीतर पॉलिसी के अनुसार न केवल कमेटियों को गठन किया जाएगा, बल्कि इन्हें क्रियान्वित भी किया जाएगा।

निदेशक ने अदालत को जानकारी दी थी कि पैराग्लाइडिंग के लिए ट्रैकिंग सिस्टम बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही है। इसके अलावा मोबाइल एप भी बनाया जा रहा है। इससे पैराग्लाइडिंग पर नियंत्रण खोकर गुम हुए पर्यटकों को तलाशने में मदद मिलेगी। साथ ही पायलट के उपकरणों की निगरानी भी की जाएगी। नेशनल पैराग्लाइडिंग स्कूल को पहली अप्रैल 2023 से चालू किया जाएगा। बता दें कि पैराग्लाइडिंग के दौरान बढ़ते हादसों को रोकने के लिए अदालत ने पर्यटन विभाग को राष्ट्रीय वायु क्रीड़ा पॉलिसी के तहत नियम बनाने के आदेश दिए थे।

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