HIV पॉजिटिव प्रसूता को डॉक्टरों का छूने से इंकार, 6 घंटे तड़पती रही महिला, नवजात की मौत

0
4

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में अमानवीय घटना सामने आई है। एचआईवी पॉजिटिव प्रसूता 6 घंटे से ज्यादा समय तक स्ट्रेचर पर पड़ी दर्द से कराहती रही। लेकिन डॉक्टरों और स्टॉफ ने महिला का प्रसव कराना तो दूर उसे छुआ तक भी नहीं।

बता दें कि रात में जब अस्पताल में शिफ्ट चेंज हुई तो एक आया ने महिला का प्रसव कराया। प्रसव में देरी होने के कारण नवजाच की हालत बिगड़ गई और सोमवार सुबह नवजात की मौत हो गई। नवजात की मौत और अस्पताल प्रशासव के इस रवैये पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। करबला निवासी एक महिला की एचआईवी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।

डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ ने नहीं लगाया हाथ
वहीं नौ महीने का गर्भ पूरा होने के बाद महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन रविवार को उसे लेकर मेडिकल कॉलेज के सौ शैय्या अस्पताल पहुंचे। य़हां पर अस्पताल स्टाफ ने महिला की फाइल में एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट देखी तो स्टाफ ने अपने हाथ खड़े कर दिए। इस दौरान प्रसूता घंटों दर्द से तड़पती रही। परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब प्रसव कराने के लिए वह मिन्नतें की गईं तो स्टाफ ने परिजनों के साथ अभद्रता की। इसके बाद एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को चिन्हांकित करने वाली एनजीओ आहाना परियोजना की सरिता यादव ने स्वास्थ्य अधिकारियों को मामले की जानकारी दी।

नवजात की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा
प्रसव में हुई घंटों की देरी के चलते नवजात की हालत बिगड़ गई। जिसके बाद उसे फौरन एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। सोमवार को नवजात की मौत होने पर परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया और शव लेने से इंकार कर दिया। महिला के घरवाले लापरवाह डॉक्टर और स्टाफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए। वहीं काफी समझाने के बाद परिजन नवजात के शव को घर लेकर गए। परिजनों का कहना है कि किसी तरह से प्रसूता का प्रसव तो करा दिया गया लेकिन टांके भी नहीं लगाए गए। एचआईवी पॉजिटिव महिला के परिजनों को ही ट्यूब दे दिया गया।

मामले की कराई जा रही जांच
अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण प्रसूता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूती रोग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा उपाध्याय के कहा कि एचआईवी पॉजिटिव महिला का पहला बच्चा था। प्रसव कराने में देरी क्यों हुई। इन मामले की जांच करवाई जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि नार्मल डिलीवरी में हर महिला को टांके लगाए जाएं। यह केवल जरूरत पर निर्भर करता है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

समाचार पर आपकी राय: