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Saturday, February 4, 2023
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कंझावला हत्या केस में दिल्ली पुलिस छिपा रही बहुत कुछ, इन प्वाइंट में समझें कार्यवाही पर क्यों उठ रहे सवाल

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नए साल के पहले दिन ही देश की राजधानी दिल्ली में कुछ ऐसा होता है, जिससे हर कोई कांप जाता है. देर रात एक कार एक स्कूटी को टक्कर मारती है और उस पर सवार लड़की को 12 से 13 किलोमीटर तक घसीटती है.

इस मामले में अब एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं. नए-नए एंगल सामने आ रहे हैं. नए-नए सीसीटीवी फुटेज और पहलुओं से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं. सभी पक्षों को जानने के बाद कहा जा सकता है कि इस मामले में अभी भी काफी कुछ आना बाकी है.

स्टोरी प्लॉट-1

नए साल की रात. अलर्ट पर दिल्ली पुलिस. सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम. चप्पे-चप्पे पर बैरिकेडिंग. फिर भी कंझावला इलाके में एक लड़की को पांच सिरफिरे कई किलोमीटर तक घसीटते हैं और न पुलिस को पता चलता है न ही कार सवार उन लड़कों को. ये कहना भी पुलिस का ही है. मामले ने तूल पकड़ा तो DCP आउटर दिल्ली हरेंद्र सिंह सामने आए और बोले, ‘हमारी जांच के अनुसार, यह एक घातक एक्सीडेंट था. कार में मौजूद सभी 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.’

प्लॉट -2

सोमवार दोपहर दिल्ली पुलिस ने पीसी करके बताया कि करीब 12 किलोमीटर कार लड़की को घसीटती रही. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार लड़की का वजन केवल 20 किलो रह गया था. घटना के दूसरे दिन दिल्ली पुलिस की पीसी कर रहे अफसर को ये भी नहीं पता होता कि आरोपियों ने शराब पी थी या नहीं?

प्लॉट-3

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले एक होटल की सीसीटीवी से खुलासा होता है, पता चलता है कि लड़की यहां अपने दोस्तों के साथ आई थी. दोपहर बाद एक निजी टीवी चैनल पर पूरी तरह लड़की की चरित्र हत्या हो जाती है. जिस लड़की ने अपनी मरती दोस्त को बचाने की जद्दोजहद न की हो , जिस लड़की ने इतने बड़े हादसे के बाद अपने घर जाकर बैठकर गई हो , वो लड़की खुलेआम एक मृत दोस्त का मान मर्दन कर रही है. कह रही है कि लड़की बहुत ज्यादा शराब पी हुई थी. लड़की अपने बॉयफ्रेंड से गुस्सा थी और जान देने की बात कह रही थी.

गाड़ी की स्पीड रहस्यमय

वीडियो फुटेज और तमाम प्रत्यक्षदर्शियों के हिसाब से ऐसा लगाता है कि कार सवार जानते थे कि उनकी गाड़ी में लड़की की डेड बॉडी अटकी है. टीवी 9 भारतवर्ष पर आए एक गवाह दीपक का कहना है कि आरोपियों की कार उनके बाइक से टकराते बच गई. जब बाइक रोक कर उसने देखा तो कार से कुछ रगड़ने की आवाज आ रही थी. गाड़ी की स्पीड भागने के अंदाज में नहीं थी. दीपक का कहना था कि आगे पुलिस चौकी को देखकर संभवतया सिंगल लेन की सड़क पर ही कार ने यू टर्न ले लिया. उसके बाद उसने कार के नीचे डेड बॉडी देखी. दीपक का कहना था कि हो सकता है कि कार में डेड बॉडी बांधी गई हो. कुछ ऐसी ही आशंका फॉरेंसिक एक्सपर्ट मानस की भी है. हालांकि, पुलिस उपायुक्त (बाहरी) हरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पीड़िता का पैर कार के एक पहिए में फंस गया और उसे करीब 4 किलोमीटर तक घसीटा गया.

किसे इशारा कर रही थीं आरोपियों की कार

कंझावली केस में पुलिस की एक्सीडेंट वाली थ्योरी पर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आरोपियों के साथ दूसरी कार में सवार लोग भी थे. सीसीटीवी फुटेज में एक्सीडेंट वाली जगह से करीब 100 मीटर की दूरी पर आरोपी बलेनो से डिपर मारकर किसे और क्या इशारा कर रहे थे? सीसीटीवी में रात के करीब 2 बजे एक्सीडेंट की जगह से महज 100 मीटर की दूरी पर बलेनो गाड़ी काफी देर तक खड़ी रही. डिपर मारने के बाद ही बलेनो आगे निकल गई.

किस समय पर हुआ हादसा

हादसे के समय को लेकर पुलिस की लीपापोती भी इस कांड को एक्सीडेंट की बजाय कुछ और की ओर इशारा कर रहे हैं. पुलिस का कहना है कि हादसा सुबह तीन बजे हुआ. लेकिन सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह सवाल उठता है कि अगर हादसा तीन बजे के आसपास हुआ तो रात के दो बजे आरोपियों की गाड़ी हादसे की जगह से 100 मीटर आगे क्या कर रही थी? पुलिस का कहना है कि गाड़ी से घसीटे जाने की कॉल उसे रात करीब 3 बजकर 24 मिनट पर मिली थी. जबकि एसएचओ सुल्तानपुरी को एक्सीडेंट की कॉल रात 3 बजकर 53 मिनट पर मिली. पुलिस को सुबह 4 बजकर 11 मिनट पर लाश के सड़क पर पड़े होने की कॉल मिली थी. मतलब पुलिस की जानकारी में पहली कॉल 3 बजकर 24 मिनट पर आई. अब सवाल यह उठता है कि क्या हादसा दो बजे के आसपास ही हो गया था? क्या कोई भी मान सकता है कि गाड़ी के बंपर में फंसी हुई लाश के साथ आरोपी इलाके में घूमते रहे?

गाड़ी में म्यूजिक चलने को लेकर सवाल

पुलिस के डीसीपी कह रहे थे कि गाड़ी का म्यूजिक इतना तेज था की गाड़ी के अंदर जो पांच आरोपी बैठे थे उनको पता ही नहीं चला. किसी भी ऑटो एक्सपर्ट से बात कर लीजिए या खुद अपनी गाड़ी को तेज म्यूजिक में बजाकर देख लीजिए. थोड़ा सा भी कुछ टकराता है तो गाड़ी के अंदर आवाज होती है. एक निजी चैनल से बातचीत में अंजली की दोस्त ने भी कहा कि कार में कोई म्यूजिक नहीं बज रहा था. पुलिस और अंजलि की दोस्त के बयान में इसतरह का विरोधाभास क्यों है?

पहले कमजोर धाराएं लगाई गईं

पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR की शुरुआत में कमजोर धाराएं लगाई थीं. न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, शुरुआत में इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 यानी तेजी से गाड़ी चलाने और 304 A यानी लापरवाही से मौत के तहत मामला दर्ज किया गया. धारा 304 A के मुताबिक कोई भी अगर लापरवाही से किसी भी व्यक्ति की मौत का कारण बनता है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है, उसे दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों के साथ दंडित किया जाएगा. यानी इस संगीन अपराध में लगाई गई धारा पर अधिकतम सजा सिर्फ दो साल की ही है.

पुलिस की इस कार्रवाई पर जब सवाल उठे तो DCP फिर एक बार पुलिस के सामने आए और FIR में धारा 304 और जोड़ दी गई. इस धारा का मतलब है गैर इरादतन हत्या और इसके तहत 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. इस मामले में आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती है. अब सवाल ये उठ रहे हैं कि मामला शुरुआत से ही इतना संगीन है तो पुलिस आखिरकार मामले के तूल पकड़ने के बाद ही क्यों जागी.

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