पपरोला आयुर्वेदिक कालेज की जान आफत में; यहां न वेंटिलेटर, न ही सीटी स्कैन

कोविड केयर सेंटर भी बना दिया; पर यहां न वेंटिलेटर, न ही सीटी स्कैन। दिन-रात कोरोना से लड़ रहा है। हर दिन स्वास्थ्य संस्थानों में एक से बढ़कर एक सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। बहुत से अस्पतालों ने इस वैश्विक लड़ाई में खुद की योग्यता साबित कर जनता का दिल लूटा है, पर प्रदेश का एकमात्र आयुर्वेदिक कालेज और अस्पताल इस लड़ाई में बहुत पिछड़ता नजर आ रहा है। देश के टॉप आयुर्वेदिक संस्थानों में शुमार पपरोला आयुर्वेदिक कालेज में कोरोना के लिए एक विशेष डेडिकेटेड अस्पताल बनाया गया है। फिलहाल 50 बिस्तर वाले इस कोविड केयर सेंटर में सुविधाएं ‘नाम बड़े, दर्शन छोटे’ जैसी हैं। ‘दिव्य हिमाचल’ ने इस कोविड अस्पताल के साथ-साथ आयुर्वेदिक कालेज में जब सुविधाओं को खंगालना शुरू किया तो निराशा के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा। कोविड अस्पताल में बिस्तरों के हिसाब से जब ऑक्सीजन की ही व्यवस्था नहीं है। बाकी सुविधाएं तो दूर की कौड़ी है। 50 बिस्तरों के लिए 24 घंटे में कम से कम ऑक्सीजन के 130 सिलेंडर चाहिए, जबकि उपलब्ध मात्र 103 हैं। कोविड अस्पताल में सबसे जरूरी एक भी वेंटिलेटर नहीं है। थोड़ा सा गंभीर मरीज आ जाए तो अन्यत्र रैफर करने के सिवा कोई चारा नहीं है। एक साथ दो-तीन मरीज रैफर करने पड़ जाएं, तो एंबुलेंस के लिए तलाश शुरू करनी पड़ती है। हालांकि इस कोविड केयर सेंटर में तीन शिफ्ट में डाक्टर व अन्य स्टाफ की ड्यूटी लगाई जा रही है। दो डाक्टर वे, जो इस संस्थान में एमडी कर रहे हैं, तीन स्टाफ नर्स के साथ अन्य कर्मचारी यहां दिन रात सेवाएं दे रहे हैं। हर शिफ्ट के बाद सेंटर को सेनेटाइज किया जा रहा है।

अब आते हैं आयुर्वेदिक कालेज अस्पताल की बेसिक जरूरतों पर। यह नामी कालेज अस्पताल है, पर यहां सीटी स्कैन भी नहीं होता। वहीं अस्पताल के पास एक भी वेंटिलेटर नहीं है। ध्यान रखें, कोविड मरीजों की जांच में भी अब सीटी स्कैन आवश्यक है। इसकी आधारभूत सुविधा अल्ट्रासाउंड है, लेकिन मशीन खराब है और इसलिए अब अल्ट्रासाउंट होते ही नहीं, और आगे बढि़ए किसी भी अस्पताल तो क्या, आज एक पीएचसी में भी डिजिटल एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध हो जाती है, लेकिन इस अस्पताल ने तो डिजिटल एक्स-रे का नाम भी नहीं सुना है। अगर किसी टॉप अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान में ये आधारभूत सुविधाएं या मरीजों की जांच पड़ताल के साधन ही नहीं हैं, तो मरीजों की जान तो बिलकुल भगवान के आसरे है। यहां 200 बिस्तरों का अस्पताल है, जो यहां की जनता के लिए स्वास्थ्य देने के लिए वरदान से कम नहीं है, पर यहां मशीनों का अकाल पड़ा हआ है। अस्पताल प्रशासन द्वारा रूटीन ओपीडी की सुविधा मरीजों को निरंतर प्रदान की जा रही है। इसके कोविड केयर सेंटर बन जाने से आम रोगियों को मिलने वाली स्वस्थ्य सुविधाएं प्रभावित नहीं हो रही हैं, लेकिन डर के चलते मरीजों की संख्या में कमी आई है। (एचडीएम)

अभी फिलहाल 50 बिस्तर 100 तक पहुंचेगी तादाद

अभी इस सेंटर में 50 बिस्तरों को व्यवस्था की गई है और शीघ्र ही यहां 100 बिस्तरों की संख्या होगी। सबसे अच्छी बात यह है कि हर बेड के पास ऑक्सीजन की वयवस्था पाइपों के माध्यम से की गई है। साथ में इस डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में मात्र उन्हीं कोरोना संक्रमण रोगियों को लाया जा रहा है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही हैं।

क्या कहते हैं एमएस

अस्पताल के एमएस डा. कुलदीप बरवाल का कहना है कि जो लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं, उन्हें घरों पर ही आइसोलेशन पर रखा जा रहा है। अगर किसी का ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है तो उसे यहां दाखिल करने की वयवस्था की गई है। अगर किसी को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है तो उसे टीएमसी के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस कोविड सेंटर में वेंटिलेटर उपलब्ध करवाने के लिए आला अधिकारियों को कहा गया है। साथ में ऑक्सीजन सिलेंडर की डिमांड भी की गई है। उन्होंने बताया कि लोग भ्रमित न हों कि पपरोला आयुर्वेद परिसर में कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। अस्पताल की ओपीडी पहले की तरह चल रही है। कोविड अस्पताल अलग भवन में अस्पताल से 200 मीटर दूरी पर है। वहां पर अलग से डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं।

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