ऑक्सीमीटर एक और आबादी 2000… बहुत बेनसाफी है, संक्रमितों की देखभाल में बेशुमार दिक्कतें

सरकार आए दिन बैठकें कर संक्रमण की रोकथाम के नई-नई योजनाएं तैयार कर रही है। ग्राउंड लेवल पर बात की जाए तो हकीकत बिलकुल इसके विपरित है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग जहां संक्रमितों को ऑक्सीमीटर समेत अन्य सुविधाओं को देने का दावा कर रही है। हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास ऑक्सीमीटर है ही नहीं। लोगों को स्वयं बाजार से महंगे दामों में ऑक्सीमीटर खरीदने पड़ रहे हैं। राज्य में ऑक्सीमीटर की कालाबाजारी भी शुरू हो चुकी है। कोविड मरीजों के ऑक्सीजन लेवल जांच के लिए एक आशा वर्कर को ऑक्सीमीटर दिए गए हैं, जबकि एक आशा वर्कर के पास दो हजार के करीब लोगों की जिम्मेदारी है। ऐसे में अगर दो हजार में से 50 लोग भी संक्रमित हो जाते हैं तो सभी को ऑक्सीमीटर मुहैया करवा पाना मुश्किल है।

इतना ही नहीं, अगर किसी को ऑक्सीमीटर दे भी दिया जाए, तो मरीज उसे अपने पास तब तक रख सकता है, जब तक वह ठीक नहीं हो जाता। ऐसे में पहुंच वाले लोगों तक तो ऑक्सीमीटर पहुंच जाता है, लेकिन साधारण लोग इसके लिए बाजार में भटकते रहते हैं। इतना ही नहीं, एक आशा वर्कर को भी कोविड मरीजों के लिए पांच किटें दी जा रही हैं। इनमें दवाइयों समेत इम्युनिटी बढ़ाने का सामान होता है। अगर एक आशा वर्कर के दायरे में एक साथ 10 कोरोना संक्रमित मिल जाएं, तो सभी मरीजों को दवाइयों की किटें तक नहीं मिल पाती है, जिससे मरीजों का उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाता है। इसमें एजिथ्रोमाइसिन, पैरासिटामोल, विटामिन-सी, एंटीबायोटिक डॉक्सी, आइवरमेक्टीन समेत अन्य दवाइयां होती हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक काढ़ा भी होता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे सरकार को प्रोपोजल भेज रहे हैं, कि ऑक्सीमीटर मुहैया करवाए जाएं, ताकि प्रदेश में कोविड मरीजों का उपचार शुरू हो सके।

बाजार में पांच हजार की मशीन

हिमाचल में ऑक्सीमीटर की कालाबाजारी होना शुरू हो गई है। जो ऑक्सीमीटर 700 से 1500 के बीच आता था, वहीं अब तीन से पांच हजार के बीच में आ रहा है। ऑनलाइन कंपनियों समेत स्थानीय दुकानदार भी मनमाने दाम वसूल रहे हैं। इससे लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस पर नियंत्रण रखे और कालाबाजारी पर अंकुश लगाए। यहां पर दुकानदार इनसे मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

गांवों में भी पहुंच गया कोविड

प्रदेश कें गांवों में कोरोना की रफ्तार बढ़ना शुरू हो गई है। कई-कई गांवों को कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात आशा वर्करों के पास पर्याप्त उपकरण न होने से लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकार को चाहिए कि समय रहते जरूरी उपकरण, ऑक्सीमीटर तथा दवाइयां मुहैया करवाई जाए।

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