अगर आप आईजीएमसी में एंडोस्कोपी करवाना चाहते हैं तो आपको कोरोना की नैगेटिव रिपोर्ट जरूर लानी होगी। अगर आपके पास कोरोना की नैगेटिव रिपोर्ट नहीं है तो एंडोस्कोपी नहीं होगी। आईजीएमसी में इन दिनों देखा जा रहा है कि कुछ लोग बिना कोरोना टैस्ट करवाए सीधे ही एंडोस्कोपी करवाने आते हैं और कई बार डॉक्टर से उलझ जाते हैं। हालांकि डॉक्टर एंडोस्कोपी करवाने को मना नहीं करते हैं। डॉक्टर मरीजों को यही निर्देश देते हैं कि कोरोना का टैस्ट करवाएं और एंडोस्कोपी हो जाएगी।

एंडोस्कोपी गैस्ट्रोलॉजी विभाग में होती है। गैस्ट्रोलॉजी के मरीजों को ही एंडोस्कोपी करवाने को कहा जाता है। डॉक्टर का मरीजों के लिए यही निर्देश है कि अगर कोरोना का टैस्ट करवाने को कहा जाता है तो जरूर करवाएं। आईजीएमसी में इन दिनों सैंकड़ों मरीज अपना उपचार करवाने आ रहे हैं। यहां पर देखने में आ रहा है कि कोरोना का टैस्ट करवाने के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते मरीज कोरोना का टैस्ट करवाने से मना कर देते हैं।

मरीज को डॉक्टर जब कोरोना का टैस्ट लिखते हैं तो उन्हें सबसे बड़ी दिक्कत यह आती है कि टैस्ट करवाने को उन्हें लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है, ऐसे में मरीज को टैस्ट करवाने के लिए शाम तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यही नहीं, उसके बाद कोरोना रिपोर्ट लेने के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो दूसरे या तीसरे दिन कोरोना की रिपोर्ट आती है। इस स्थिति में मरीजों को कोरोना के टैस्ट करवाना मुश्किल हो जाता है। कोरोना की रिपोर्ट न मिलने से इन दिनों मरीजों के ऑप्रेशन तक लटक रहे हैं।

हमेशा ही देखने में आया है कि जब किसी मरीज का ऑप्रेशन होता है तो डाक्टर मरीज को कोरोना का टैस्ट लिखते हैं। यह भी कहा जाता है कि ऑप्रेशन थिएटर में कोरोना की नैगेटिव रिपोर्ट साथ लेकर आएं लेकिन होता यह है कि मरीज टैस्ट तो करवा लेता है परंतु उसे समय से कोरोना की रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। ऐसी स्थिति में मरीज के ऑप्रेशन तक नहीं होते हैं। आईजीएमसी में हर मरीज की यही हालत बन चुकी है कि उन्हें कोरोना की रिपोर्ट समय से नहीं मिल पाती है। टैस्ट की प्रक्रिया को प्रशासन को सरल बनाना होगा, तभी लोग यहां आसानी से अपना उपचार करवा सकते हैं।

आईजीएमसी के एमएस डॉ. जनकराज ने कहा कि कोरोना की टैस्ट रिपोर्ट कई बार लेट हो जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि कई बार लैब में ज्यादा सैंपल आ जाते हैं, जिससे सैंपलों की जांच करने में समय लगता है। जिन मरीजों को डाक्टर कोरोना के टैस्ट करवाने को कहते हैं, उन्हें टैस्ट करवाना जरूरी होता है। कोशिश की जा रही है कि टैस्ट की प्रक्रिया को और ज्यादा सरल बनाया जाएगा।

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