कोरोना संकट: हिमाचल सरकार को गांवों की चिंता, चुनौतियों के अंबार

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शहरों में कोरोना संकट के बीच अब हिमाचल सरकार की सबसे बड़ी चिंता गांवों की है। ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर यह वायरस इन इलाकों में ज्यादा फैल गया तो इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। गांवों में स्वास्थ्य ढांचे की भी हालत खराब है। इनमें कई संस्थानों में न तो पर्याप्त डॉक्टर, नर्स या अन्य स्टाफ है और न ही ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार को गांवों की चिंता का ख्याल आया है।

गांवों में तेजी से कोरोना संक्रमण फैल रहा है। यहां सबसे बड़ी समस्या लोगों की कोविड टेस्टिंग की है। प्रदेश की वर्तमान में रोजाना की करीब 20 हजार नमूनों की टेस्टिंग की क्षमता है, जबकि हिमाचल की आबादी करीब 70 लाख है। दूसरी बड़ी चुनौती स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी, सीएचसी में एक तो पहले से ही डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है। ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों का प्रबंध करना आसान काम नहीं होगा। एक अन्य चुनौती संक्रमण से बचे गांवों को महफूज रखने की भी है। 

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