Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह की कानूनी मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई उनकी विवादित टिप्पणी के लिए दूसरी बार माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि अब माफी मांगने के लिए बहुत देर हो चुकी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर अगले दो सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला ले।
‘मगरमच्छ के आंसू’ नहीं आएंगे काम
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। मंत्री विजय शाह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शाह की पिछली माफी का जिक्र करते हुए उसे ‘मगरमच्छ के आंसू’ करार दिया। कोर्ट का मानना है कि ऐसी माफी केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का एक जरिया मात्र है।
SIT ने पूरी की जांच, रिपोर्ट सौंपी
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अदालत को सूचित किया कि जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। SIT ने अपनी फाइनल रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश कर दी है। अब केवल राज्य सरकार की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद ही मंत्री के खिलाफ ट्रायल शुरू हो पाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए और सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना होगा।
भारतीय न्याय संहिता के तहत होगी कार्रवाई
SIT की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 196 के तहत आता है। इस धारा के तहत किसी भी लोक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है। राज्य सरकार ने अब तक सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर यह मंजूरी नहीं दी थी। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 14 दिनों की स्पष्ट समय सीमा दे दी है।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चर्चा में आईं कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर शुरू हुआ था। मंत्री विजय शाह ने उनके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक बातें कही थीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद मंत्री पर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।
