New Delhi/Tehran News: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अब खूनी रूप ले लिया है। देश के हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दावा किया है कि ईरान में अब तक 3000 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि खामेनेई शासन के लिए अगले कुछ दिन बेहद भारी पड़ने वाले हैं। वहां फंसे भारतीय छात्रों के परिजन अनहोनी के डर से सहमे हुए हैं।
ईरान छोड़ने का फरमान और परिजनों का दर्द
ईरान में पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता बेहद परेशान हैं। श्रीनगर की रहने वाली रेहाना ने बताया कि बच्चों को अचानक एम्बेसी बुलाया गया। अधिकारियों ने छात्रों को बिना किसी सरकारी मदद के खुद ही ईरान छोड़ने का आदेश दे दिया है। छात्रों ने सुरक्षित निकाले जाने (इवैक्युएशन) की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। रेहाना ने सरकार से अपील की है कि बच्चों को एयरलिफ्ट किया जाए। उनका कहना है कि अगर वे टिकट भेज भी दें, तो दंगों के बीच बच्चे एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचेंगे? तेहरान में फंसे छात्रों के परिवार दहशत में हैं।
शशि थरूर का बड़ा दावा: खतरे में खामेनेई शासन
विदेश मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन शशि थरूर ने ईरान के हालात को चिंताजनक बताया है। थरूर ने कहा कि ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं, इसलिए सही जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि हिंसा में 3000 लोग मारे जा चुके हैं। थरूर का मानना है कि खामेनेई शासन इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में वहां कुछ बड़ा और गंभीर होने वाला है। अगर मौजूदा सरकार को टिकना है, तो उसे इस मुश्किल वक्त का सामना करना होगा।
भारत सरकार की एडवाइजरी: तुरंत छोड़ें देश
बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने एक जरूरी एडवाइजरी जारी की है। ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को सतर्क रहने को कहा गया है। सरकार ने साफ कहा है कि जो भी परिवहन साधन मिले, उससे तुरंत ईरान छोड़ दें। अभी वहां करीब 10 हजार भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। दूतावास ने सभी को विरोध-प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। साथ ही, भारतीय नागरिकों को दूतावास के संपर्क में रहने और स्थानीय अपडेट्स पर नजर रखने को कहा गया है।
