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एनएचपीसी टनल की दुर्घटना के लिए कंपनी और ठेकेदार जिमेवार- सीटू

घोटालों में घिरी एनएचपीसी परियोजना पर अब निर्माण कार्यों में सुरक्षा को लेकर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। 800 मेगावाट की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण दो का निर्माण कार्य 1998 से चल रहा है। लेकिन 23 साल बाद भी परियोजना का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। हादसे के लिए टनल का निर्माण कर रही कंपनी व ठेकेदार के साथ एनएचपीसी भी जिम्मेदार है।

परियोजना के निर्माण में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने काम किया। लेकिन बीच में काम छोड़ कर चली गई। अब परियोजना का निर्माण कंपनियों के बजाय ठेकेदारों को सौंपा गया है। परियोजना का कई जगहों का काम सब लेटिग होने से जहां निर्माण कार्यों में कामगारों की सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वहीं परियोजना का काम भी तय समय पर पूरा नहीं हो रहा है।

सीटू के जिला महासचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि पार्वती जल विद्युत परियोजना का उद्घाटन 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। आज तक इससे बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। परियोजना का लक्ष्य 2007 में पूरा होना था। ऐसे में परियोजना की लागत भी पहले से कई गुना अधिक बढ़ गई है।

परियोजना का जिस जगह पर निर्माण हो रहा है, वहां किसी तरह की दूरसंचार सेवा की सुविधा नहीं है। इस वजह से हादसा होने पर प्रशासन, पुलिस व अन्य एजेंसियां से मदद मांगने में समय लगता है। अगर कहीं टनल का निर्माण हो रहा है तो वहां हादसे का अधिक खतरा रहता है। ऐसे में इन जगहों पर न केवल एंबुलेंस, बल्कि वाकीटॉकी की सुविधा भी रहनी चाहिए। लेकिन एनएचपीसी की निर्माण साइट में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। उन्होंने मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। सीटू नेता ने कहा कि अगर कंपनी ने कामगारों को ग्रुप इंश्योरेंस नहीं करवाया है तो सीटू मजदूरों के हक के लिए कोर्ट जाएगी।

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