Madhya Pradesh News: मकर संक्रांति से ठीक पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने चाइनीज मांझे को लेकर बेहद सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट कहा कि अगर कोई नाबालिग बच्चा इस जानलेवा डोर से पतंग उड़ाता पाया गया, तो उसके लिए अभिभावक जिम्मेदार होंगे। माता-पिता पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चाइनीज मांझे (नायलॉन डोर) पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
लापरवाही पर दर्ज होगा केस
अदालत ने प्रशासन को जनता के बीच जागरूकता फैलाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि लोगों को बताया जाए कि चाइनीज मांझे की बिक्री या उपयोग अपराध है। दोषी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (1) के तहत कार्रवाई हो सकती है। यह धारा लापरवाही के कारण होने वाली मृत्यु से संबंधित है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर बच्चे के हाथ में यह मांझा दिखा, तो कानूनन जवाबदेही उसके परिवार की होगी।
हाईकोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान
इंदौर में चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और हादसों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने पिछले साल 11 दिसंबर को इस मामले पर खुद संज्ञान लिया था। इसे जनहित याचिका के रूप में सुना जा रहा है। कोर्ट का मानना है कि नायलॉन का यह तीखा धागा लोगों की जान ले रहा है और इसे रोकना जरूरी है।
सरकार चलाएगी जागरूकता अभियान
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे की बिक्री रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाएगी। कोर्ट ने सरकार को विशेष निर्देश दिया कि विज्ञापनों में सजा के प्रावधान का जिक्र जरूर करें। लोगों को पता होना चाहिए कि इस मांझे का इस्तेमाल उन्हें जेल भी पहुंचा सकता है।
इंदौर में जा चुकी हैं कई जान
सुनवाई के दौरान इंदौर के जिलाधिकारी (DM) शिवम वर्मा कोर्ट में उपस्थित रहे। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि प्रशासन जल्द ही आवश्यक आदेश जारी करेगा। इन निर्देशों को पड़ोसी जिलों में भी तुरंत भेजा जाएगा। बता दें कि इंदौर में पिछले डेढ़ महीने के अंदर चाइनीज मांझे से गला कटने की कई घटनाएं हुई हैं। इसमें एक 16 साल के किशोर और 45 साल के व्यक्ति की मौत हो चुकी है। प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे इसका इस्तेमाल जारी है।
