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China Spy Plan: लंदन के नीचे चीन ने बिछाया 208 गुप्त कमरों का जाल! अमेरिका तक में मचा हड़कंप

London News: ब्रिटेन की राजधानी लंदन में चीन की एक हरकत ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। चीन यहां अपनी ‘सुपर-एंबेसी’ बना रहा है, लेकिन इसके नक्शे ने अमेरिका और ब्रिटेन की नींद उड़ा दी है। एक ब्रिटिश अखबार ने सनसनीखेज खुलासा किया है। खबर है कि इस दूतावास के नीचे 208 गुप्त कमरों का एक विशाल नेटवर्क बनाया जा रहा है। इसे जासूसी का नया और सबसे खतरनाक केंद्र माना जा रहा है।

208 सीक्रेट कमरों का काला सच

चीन ने साल 2018 में टावर ऑफ लंदन के पास ऐतिहासिक ‘रॉयल मिंट कोर्ट’ खरीदा था। यहां वह यूरोप का अपना सबसे बड़ा राजनयिक परिसर बना रहा है। यह करीब 22,000 वर्ग मीटर में फैला होगा। लेकिन ब्रिटिश अखबार ‘द टेलीग्राफ’ ने इसका एक खुफिया नक्शा लीक कर दिया है। नक्शे में इमारत के नीचे 208 गुप्त कमरे दिखाई दे रहे हैं। चीन इन कमरों को दुनिया की नजरों से छिपाकर रखना चाहता था।

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इंटरनेट केबल के पास जासूसी का ‘अड्डा’

सबसे गंभीर खतरा इन कमरों की लोकेशन को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, दूतावास के बेसमेंट का एक छिपा हुआ कमरा लंदन की बेहद संवेदनशील फाइबर-ऑप्टिक केबलों के एकदम पास है। ये केबलें ही सिटी ऑफ लंदन का सारा वित्तीय डेटा, लाखों ईमेल और मैसेज ट्रैफिक संभालती हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि चीन यहां से ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की जासूसी कर सकता है। इन केबलों को यहां से आसानी से टैप किया जा सकता है।

वेंटिलेशन सिस्टम ने खोली पोल

नक्शों में इन सीक्रेट कमरों के लिए ‘हॉट एयर वेंटिंग सिस्टम’ दिखा है। ऐसी व्यवस्था आम तौर पर बड़े सर्वर रूम या भारी जासूसी उपकरणों को ठंडा रखने के लिए की जाती है। इसी बात ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। बकिंघम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंथनी ग्लीस ने इसे ‘पागलपन’ बताया है। उनका मानना है कि यह दूतावास राजनयिक काम से ज्यादा एक खुफिया केंद्र (Spy Hub) के रूप में काम करेगा।

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अमेरिका भी टेंशन में, व्हाइट हाउस अलर्ट

इस खुलासे से अमेरिका भी घबराया हुआ है। एक अधिकारी के मुताबिक, व्हाइट हाउस इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद चिंतित है। अमेरिका को डर है कि इससे ब्रिटेन और अमेरिका की साझा खुफिया साझेदारी खतरे में पड़ जाएगी। ब्रिटिश संसद में भी इसको लेकर हंगामा बरपा है। सांसद सारा चैंपियन ने चीन को खुलकर ‘दुश्मन देश’ बताया है। अब देखना होगा कि ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर अपनी चीन यात्रा से पहले इस ‘मेगा दूतावास’ को मंजूरी देते हैं या सुरक्षा को चुनते हैं।

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