China News: चीन ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की शुरुआत कर दी है। देश के जिआंगसू प्रांत के लियानयुंगांग शहर में दुनिया का पहला ‘हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट’ बन रहा है। इस ‘शुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट’ का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की यह पहली परमाणु परियोजना है। इसे साल 2032 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट?
हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट एक बेहद आधुनिक तकनीक है। इसमें एक ही सिस्टम में दो अलग-अलग तरह के परमाणु रिएक्टर जोड़े जाते हैं। सामान्य न्यूक्लियर प्लांट का काम सिर्फ बिजली बनाना होता है। मगर हाइब्रिड मॉडल इससे दो कदम आगे है। यह प्लांट बिजली के साथ हाई-क्वालिटी वाली भाप (Steam) भी बनाता है। इस भाप का इस्तेमाल उद्योगों और हाइड्रोजन उत्पादन में किया जा सकता है। यह ऊर्जा का ज्यादा असरदार और बहुउपयोगी तरीका है।
दो शक्तिशाली तकनीकों का संगम
इस हाइब्रिड प्लांट की बनावट काफी अनोखी है। इसमें ‘हुआलोंग वन’ रिएक्टर और ‘हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड’ रिएक्टर को एक साथ जोड़ा गया है।
- हुआलोंग वन: यह एक आधुनिक प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर है। यह सुरक्षित और लगातार बिजली बनाने के लिए जाना जाता है।
- हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर: यह बहुत उच्च तापमान पर काम करता है। इससे उच्च गुणवत्ता वाली भाप तैयार होती है।
इन दोनों के मिलन से न केवल बिजली मिलेगी, बल्कि इंडस्ट्रियल स्टीम की जरूरतों को भी पूरा किया जा सकेगा।
दुनिया के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए इस हाइब्रिड प्लांट को गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे ऊर्जा की कार्यक्षमता बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उद्योगों को अब साफ और स्थिर ऊर्जा मिल सकेगी। बिजली और भाप की दोहरी आपूर्ति से रिफाइनरी, केमिकल और हाइड्रोजन उत्पादन जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन का यह प्रयोग सफल रहा, तो दुनिया भर में ऊर्जा उत्पादन का तरीका बदल सकता है।

