New Delhi News: दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का डंका बज रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है। साल 2026 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की विकास दर (GDP Growth) 6.2% रहने का अनुमान है। यह रफ़्तार जी-20 देशों में सबसे ज्यादा है। भारत ने चीन और अमेरिका जैसे सुपरपावर देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
भारत की मजबूती के पीछे क्या है राज?
आईएमएफ के अनुसार, भारत का यह प्रदर्शन कोई चमत्कार नहीं, बल्कि मजबूत नीतियों का नतीजा है। देश में मिडिल क्लास बहुत तेजी से बढ़ रहा है। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है, जो काम करने में सक्षम है। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका अहम हो गई है। दुनिया अब विकास के लिए अमेरिका या चीन पर नहीं, बल्कि भारत पर भरोसा जता रही है।
चीन और इंडोनेशिया भी रेस में, लेकिन भारत से पीछे
इस लिस्ट में भारत के बाद दूसरा नंबर इंडोनेशिया का है। इंडोनेशिया की विकास दर 4.9% रहने का अनुमान है। वहीं, कभी दुनिया का ग्रोथ इंजन कहा जाने वाला चीन तीसरे नंबर पर खिसक गया है। चीन की जीडीपी ग्रोथ 4.2% रहने की उम्मीद है। चीन इस वक्त रियल एस्टेट संकट और कमजोर घरेलू मांग से जूझ रहा है। वहां की बूढ़ी होती आबादी भी एक बड़ी चिंता है।
G-20 देशों का पूरा रिपोर्ट कार्ड
आईएमएफ ने दुनिया के 20 सबसे ताकतवर देशों (G-20) की लिस्ट जारी की है। इसमें जापान सबसे निचले पायदान पर है।
- 1. भारत (6.2%): दुनिया में सबसे तेज रफ़्तार। निवेश और मैन्युफैक्चरिंग से मिल रही है ताकत।
- 2. इंडोनेशिया (4.9%): कमोडिटी एक्सपोर्ट और घरेलू खपत के दम पर दूसरा स्थान।
- 3. चीन (4.2%): आर्थिक सुस्ती के बावजूद कई अमीर देशों से आगे।
- 4. अर्जेंटीना (4.0%): आर्थिक सुधारों से रिकवरी की राह पर।
- 5. सऊदी अरब (4.0%): तेल के अलावा अन्य सेक्टर में निवेश से फायदा।
- 6. तुर्की (3.7%): ग्रोथ अच्छी है, लेकिन महंगाई बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- 7. ऑस्ट्रेलिया (2.1%): ऊंची ब्याज दरों के कारण रफ़्तार मध्यम है।
- 8. अमेरिका (2.1%): दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी की रफ़्तार अब धीमी पड़ रही है।
- 9. ब्राजील (1.9%): कृषि क्षेत्र से मिल रहा है सहारा।
- दक्षिण कोरिया (1.8%): वैश्विक मांग में कमी से निर्यात पर असर।
इन देशों की हालत है पतली
लिस्ट के निचले हिस्से में यूरोप के कई बड़े देश शामिल हैं।
- कनाडा (1.5%): हाउसिंग सेक्टर की सुस्ती ने बढ़ाई चिंता।
- मैक्सिको (1.5%): अमेरिका के साथ व्यापार से थोड़ा फायदा।
- यूरोपीय संघ (1.4%): औद्योगिक मंदी और महंगे ईंधन से दबाव में।
- ब्रिटेन (1.3%): ब्रेक्जिट के बाद की चुनौतियां अभी भी बरकरार।
- दक्षिण अफ्रीका (1.2%): बिजली संकट और बेरोजगारी ने रोकी राह।
- रूस (1.0%): प्रतिबंधों और युद्ध का अर्थव्यवस्था पर साफ असर।
- फ्रांस (0.9%): कमजोर मांग के कारण ग्रोथ लगभग रुक सी गई है।
- जर्मनी (0.9%): यूरोप का यह दिग्गज देश तकनीकी मंदी का शिकार है।
- इटली (0.8%): भारी कर्ज के बोझ तले दबी है इकोनॉमी।
- जापान (0.6%): सबसे नीचे जापान है, जहां बुजुर्ग आबादी और कम मांग बड़ी समस्या है।
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