बर्ड फ्लू की दस्तक से राजधानी शिमला में चिकन कारोबार में 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। शहरवासियों ने बर्ड फ्लू के चलते चिकन खाने से तौबा कर ली है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोग चिकन खाने से परहेज कर रहे हैं, जिसने शिमला में पोल्ट्री फार्म से जुड़े कारोबारियों की परेशानी भी बढ़ा दी है। नगर निगम के स्लाटर हाऊस में भी चिकन की डिमांड नहीं होने के कारण बहुत कम मात्रा में चिकन पहुंच रहा है। निगम प्रशासन का कहना है कि बर्ड फ्लू का असर शिमला में दिखा है। इसके चलते स्लाटर हाऊस में चिकन कम आ रहा है। शिमला में 50 प्रतिशत चिकन कारोबार कम हो गया है। कोरोना से पहले ही आम आदमी डरा हुआ है। अब बर्ड फ्लू की दस्तक से लोग चिकन खाने से परहेज कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह का संक्रमण न फैल सके।

निगम के वीपीएचओ डॉ. नीरज मोहन का कहना है कि बर्ड फ्लू के कारण शिमला में चिकन की डिमांड में 50 फीसदी गिरावट आई है। लोग चिकन खाने से तौबा कर रहे हैं, जिससे कारोबार डाऊन हुआ है। लालपानी स्थित निगम के स्लाटर हाऊस से ही पूरे शहर में चिकन की सप्लाई होती है लेकिन यहां पर डिमांड आधी हो गई है। शहर के चिकन कारोबारी खास तौर से जो चिकन बेचते हैं, वे चिकन से परहेज कर रहे हैं। हालांकि शहर में नॉनवैज के शौकीन चिकन छोड़कर अब मीट को तवज्जो दे रहे हैं, जिससे मीट के कारोबार में हल्का उछाल देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों में भी बर्ड फ्लूू का खतरा बढ़ रहा है। इसको लेकर सरकार अपने स्तर पर ठोस कदम भी उठा रही है।

बर्ड फ्लू के बीच चिकन खाते वक्त अधिक सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की मानें तो इन परिस्थितियों में अगर कोई चिकन खाना चाहता है तो चिकन को अच्छे से धोने के बाद पूरी तरह पकाना जरूरी होता है ताकि बर्ड फ्लू का असर न रह सके। पूरी तरह से चिकन न पकने पर इसमें संक्रमण का खतरा हो सकता है।

By RIGHT NEWS INDIA

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