Himachal News: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां बच्चों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। बाजार में फ्रूट जेली के नाम पर जो बिक रहा है, वह जांच में फेल हो गया है। लैब रिपोर्ट में पता चला है कि इस जेली में फलों का कोई अंश ही नहीं है। यह खबर हर माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
लैब रिपोर्ट में खुली जेली की पोल
सीटीएल कंडाघाट लैब की रिपोर्ट ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस उत्पाद को फ्रूट जेली बताकर बेचा जा रहा था, वह पूरी तरह नकली निकला। विभाग ने इस सैंपल को ‘मिसलीडिंग’ और ‘मिस-ब्रांडेड’ श्रेणी में डाला है। जांच में यह भी पता चला कि दुकानदार खुद ही अपनी दुकान में यह जेली बना रहा था। वह इसे केवल अपनी दुकान पर नहीं, बल्कि आसपास की दुकानों पर भी सप्लाई कर रहा था।
अधिकारियों ने शुरू की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनुज शर्मा की टीम ने बद्दी में औचक निरीक्षण किया था। उन्हें जेली को लेकर शक हुआ और उन्होंने सैंपल भर लिए। पैकेट पर जो सामग्री लिखी थी, वह जांच में नहीं मिली। यह सीधे तौर पर एफएसएसएआई (FSSAI) के नियमों का उल्लंघन है। अब विभाग उन दुकानों की सूची बना रहा है, जहां यह जहरीली जेली सप्लाई की गई थी। विभाग बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
10 लाख तक का हो सकता है जुर्माना
विभाग ने आरोपी कारोबारी पर शिकंजा कस दिया है। सहायक आयुक्त डॉ. अतुल कायस्थ ने बताया कि कारोबारी को नोटिस जारी किया गया है। उसे 30 दिन के भीतर लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। नियमों के मुताबिक, भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचने पर 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
