Category Archives: Write-up

कुछ दर्द शायद बांटने लायक नहीं होते हैं , कुछ का गवाह सिर्फ सनाटा होता है-तृप्ता भाटिया

कभी-कभी अरमान लटके रह जाते हैं फंदे पे और ज़िन्दगी का स्टूल खिसक जाता है। वर्षों का गुमान एक झटके में जब टूटता है तो सब बिखर जाता है। दर्द में कौन नहीं जी रहा ज़िन्दगी किसी के लिए आसान नहीं है बस सबकी दर्द झेलने की क्षमता अलग-अलग है। संघर्ष की भट्टी में तपने के बाद अपनी कई इच्छाएं

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अदानी ग्रुप भी लोगो को नौकरी से निकालने में नहीं है पिछे – रमेश भारद्वाज

मोदी जिन पूंजीपतियों को देश की सम्पत्ति बेच रहे है, उनमें से एक उद्योगपति हैं गौतम अदानी। फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक गौतम अदानी भले ही भारत के दूसरे सबसे अमीर आदमी होंगे, लेकिन अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने में वो भी पीछे नहीं हैं। पहले तो अदानी ग्रुप अपने कर्मचारियों से रेजिग्नेशन मांगता हैं और अगर किसी ने रेजिग्नेशन

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बादल – साक्षी सूर्या

छाए बादल आसमान में देखोआज बहुत ही वर्षा लाएंगेसींचेंगे धरा का कोना-कोनाखेत फसलों से लहलहराएंगेनाच उठेंगे पंछी मोर पपीहा गाएंगेरूखे सूखे कुंए तालाब भर जाएंगेनदी-नाले झरने फिर से जाग उठेंगेमस्ती में अपनी झूम गीत सुनाएंगेफूल खिलेंगे हर डाली-डाली परतितली भौंरें खूब उसपर मंडराएंगेहरियाली से होगा पहाड़ों का श्रृंगारदेख नजारा नन्हे बच्चे दिल बहलाएंगेठंडी-ठंडी हवा के झोंके आकरपेड़ों को खूब नचाएंगेछाए

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लाचार सपने -तृप्ता भाटिया

ठंड का प्रकोप हर कहीं जारी है, यह मौसम भी बेरहम होता है। जहां हम शिमला की बर्फ़बारी का आनंद लेते हैं, पेड़ो पर बंदरों को भी अठखेलियाँ करते देखते हैं और पर्यटकों को खुशी में झूमते। हर तरफ अपने-अपने मोबाइल लिए कोई सेल्फी ले रहा, कोई वीडियो बना रहा तो कोई लाइव। किसी को फिसलते देख हंस रहे तो

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लोग चरित्रहीन बोल दें तो मुझे दुखता है – तृप्ता भाटिया

मन तो करता है कि कुछ लोगों की और उनके पाखंड की धज्जियां उड़ा दूँ, उनकी धार्मिक और राजनीतिक भावना को इतना आहत करूँ कि ज्ञान देने भूल जायें फिर सोचती हूँ इनका वही हाल “सावन के अंधे को सब हरा-हरा दिखता है” । कुछ लोगों ने औकात में छोटा समझा वो छोटा समझ के आशीर्वाद दे दें। जिनको लगता

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