Himachal Pradesh News: देवभूमि के नाम से मशहूर Himachal Pradesh अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन कुल्लू घाटी में बसा एक गांव अपने अजीबोगरीब नियमों के कारण चर्चा में है। मलाना नाम के इस गांव में बाहरी लोगों के लिए कड़े नियम हैं। यहां गैर-निवासियों को किसी भी चीज या इंसान को छूने की सख्त मनाही है। हाल ही में एक वायरल वीडियो ने इस रहस्यमयी गांव की परंपराओं को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
पर्यटकों के लिए सख्त निर्देश
कुल्लू वैली का मलाना गांव अपनी खूबसूरती के साथ-साथ सख्ती के लिए भी जाना जाता है। इंस्टाग्राम पर तुशीका अग्रवाल ने अपना अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस गांव में आपका स्वागत आम जगहों जैसा नहीं होता। यहां पहुंचने पर पर्यटक खुद को काफी अलग-थलग महसूस करते हैं। गांव का सबसे बड़ा और अहम नियम ‘अस्पृश्यता’ से जुड़ा है। आप यहां के स्थानीय निवासियों को छू नहीं सकते हैं। इतना ही नहीं, यहां के प्राचीन मंदिरों और घरों को छूना भी वर्जित है।
जमीन पर रखकर देने पड़ते हैं पैसे
Himachal Pradesh के इस गांव में व्यापार करने का तरीका भी बिल्कुल जुदा है। वायरल वीडियो में तुशीका ने दिखाया कि कैसे उन्हें सामान खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने दुकानदार को पैसे दिए, लेकिन हाथ में नहीं। उन्हें पैसे जमीन पर रखने पड़े। इसके बाद दुकानदार ने उन पैसों को उठाया। पर्यटकों को दुकानों के अंदर प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं दी जाती है। यह नियम हर बाहरी व्यक्ति पर समान रूप से लागू होता है।
सिकंदर के वंशज और अपनी संसद
मलाना गांव का इतिहास काफी रोचक है। यहां के निवासी खुद को सिकंदर महान (Alexander the Great) के सैनिकों का वंशज मानते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यहां की प्रशासनिक व्यवस्था है। मलाना में भारत का संविधान या कानूनी ढांचा पूरी तरह लागू नहीं होता है। यहां सदियों पुरानी अपनी एक अलग संसद और न्याय प्रणाली है। गांव के फैसले इसी पारंपरिक परिषद द्वारा लिए जाते हैं। यहां के लोग अपनी वंशावली और नियमों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। Himachal Pradesh के इस गांव के नियमों पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे भेदभावपूर्ण मान रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में पूछा कि क्या ये डॉक्टर के पास भी ऐसा ही करते हैं? वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि हर जगह की अपनी संस्कृति होती है। हमें मलाना के स्थानीय नियमों और निजता का सम्मान करना चाहिए।
